नई दिल्ली। अमेरिका के टेक्सास में रहने वाले भारतीय मूल के आनंद शुक्ला को बड़े पैमाने पर टैक्स धोखाधड़ी की साजिश में भूमिका के लिए पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुक्ला ने देशभर के कारोबारियों को ऐसी ट्रस्ट आधारित टैक्स योजना बेचने और लागू कराने में मदद की, जिसके जरिए अमेरिकी सरकार से 2.7 करोड़ डॉलर से अधिक यानी करीब ₹258 करोड़ की आय छिपाई गई।
जोनस्टाउन, टेक्सास निवासी शुक्ला को अमेरिकी अदालत ने 60 महीने की जेल की सजा सुनाई। उसने अमेरिका को धोखा देने की साजिश के एक आरोप में अपना अपराध स्वीकार किया था। यह योजना 2017 से 2025 के बीच संचालित होने का आरोप है और इसके तहत कारोबारियों को एक ऐसे ट्रस्ट आधारित ढांचे में शामिल किया जाता था, जिसे अभियोजन पक्ष ने अवैध और दुरुपयोग वाली टैक्स बचत योजना बताया।
जांच के मुताबिक, शुक्ला और उसके सहयोगियों ने इस व्यवस्था का प्रचार देशभर में सेमिनार, वेबिनार, पॉडकास्ट और सीधे बिक्री प्रस्तावों के जरिए किया। संभावित ग्राहकों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि वे अपनी संपत्ति पर नियंत्रण बनाए रखते हुए उसे औपचारिक रूप से अपने स्वामित्व से बाहर रख सकते हैं और इस तरह अपनी कारोबारी आय पर लगने वाले टैक्स को बड़े स्तर पर कम या खत्म कर सकते हैं।
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इस योजना के लिए ग्राहकों से आम तौर पर 25,000 से 55,000 डॉलर तक शुल्क लिया जाता था। कुछ मामलों में फीस 2,25,000 डॉलर तक बताई गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुक्ला ग्राहकों को अपने कारोबार की संरचना इस तरह बदलने के निर्देश देता था कि उनकी करीब 98 प्रतिशत आय कई ट्रस्ट और एक निजी पारिवारिक फाउंडेशन के जरिए स्थानांतरित हो जाए।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इस ढांचे का वास्तविक उद्देश्य आय को आंतरिक राजस्व सेवा यानी आईआरएस से छिपाना था, जबकि ग्राहक अपने पैसे पर वास्तविक नियंत्रण बनाए रखते थे। शुक्ला ने कथित तौर पर ग्राहकों को ट्रस्ट खातों से निजी खर्चों का भुगतान करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इनमें वाहन, मनोरंजन और घर के कर्ज की किस्त जैसे खर्च शामिल थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुक्ला केवल योजना का प्रचार करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने खुद भी इस टैक्स ढांचे का इस्तेमाल किया। उसने ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज तैयार किए, अन्य लोगों को इस योजना को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित किया और ग्राहकों को ऐसे टैक्स तैयार करने वालों के पास भेजा, जिनके बारे में उसे पता था कि वे इस व्यवस्था में सहयोग करेंगे।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन गतिविधियों के जरिए शुक्ला ने कारोबारियों को अपनी आय छिपाने में मदद की और कुल 2.7 करोड़ डॉलर से अधिक की आय आईआरएस से छिपाई गई। मामला सामान्य टैक्स प्लानिंग से अलग था, क्योंकि जांच में इस्तेमाल किए गए ढांचे को जानबूझकर आय छिपाने और व्यक्तिगत खर्चों को कारोबारी खर्च के रूप में दिखाने के लिए तैयार किए जाने का आरोप था।
शुक्ला ने 10 मार्च को अमेरिका को धोखा देने की साजिश के एक आरोप में अपना अपराध स्वीकार किया था। मामले की जांच आईआरएस की आपराधिक जांच इकाई ने की। अभियोजन अमेरिकी न्याय विभाग की राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन इकाई की कर शाखा ने संभाला।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह मामला उन योजनाओं के खिलाफ कार्रवाई का हिस्सा है, जिनमें कारोबारियों को वैध टैक्स योजना के नाम पर ऐसी संरचनाओं में शामिल किया जाता है जिनका उद्देश्य आय और संपत्ति को कर अधिकारियों से छिपाना होता है। अदालत की सजा के साथ शुक्ला की भूमिका पर चल रही आपराधिक कार्रवाई का प्रमुख चरण पूरा हो गया है।
