भारत ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को देश की सीमाओं तक पहुंचने से पहले ही ध्वस्त करने के लिए एक समन्वित बहु-एजेंसी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस नई रणनीति का उद्देश्य केवल भारत में प्रवेश के बाद नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित रहने के बजाय उनकी तस्करी को स्रोत स्तर पर ही रोकना है।
यह रणनीति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मादक पदार्थों के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति के अनुरूप तैयार की गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मार्च और अप्रैल के दौरान आयोजित कई उच्चस्तरीय बैठकों के बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया गया, जिनमें से कुछ बैठकों की अध्यक्षता स्वयं गृह मंत्री ने की थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य फोकस उन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करना है, जो नशीले पदार्थों के उत्पादन, वित्तपोषण, परिवहन और वितरण में शामिल हैं, ताकि भारत पहुंचने से पहले ही उनकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
नई रणनीति के तहत खुफिया, प्रवर्तन और जांच एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी तंत्र का व्यापक आकलन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत प्रमुख तस्करी मार्गों की पहचान, बड़े ड्रग सरगनाओं की प्रोफाइलिंग, वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क की पड़ताल तथा गोल्डन ट्रायंगल, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क का मानचित्रण किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त खुफिया सूचनाओं को एकीकृत कर संयुक्त परिचालन ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे समन्वित कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा सके। विदेशों में तैनात भारतीय अधिकारियों को भी विदेशी सरकारों के साथ खुफिया सहयोग बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी संगठनों से संबंधित कार्रवाई योग्य सूचनाएं जुटाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, अब अभियान का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की खेप जब्त करना नहीं, बल्कि पूरे उस तंत्र को समाप्त करना है जो अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी को संचालित और वित्तपोषित करता है। इसके लिए उन्नत निगरानी, वित्तीय जांच, तकनीकी मॉनिटरिंग और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
यह अभियान युद्धस्तर पर खुफिया आधारित बहु-एजेंसी मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा, जैसा मॉडल पहले वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियानों में अपनाया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और सीमा पार सक्रिय आपराधिक नेटवर्क की पहचान तथा उनके खिलाफ कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
नई व्यवस्था के तहत केवल तस्करी मार्ग ही नहीं, बल्कि ड्रग उत्पादन केंद्र, प्रीकर्सर केमिकल की आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय नेटवर्क, डार्कनेट मार्केटप्लेस, क्रिप्टोकरेंसी आधारित लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक चैनलों को भी निशाना बनाया जाएगा, जिनका उपयोग संगठित अपराध सिंडिकेट कथित रूप से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए करते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इन आपस में जुड़े नेटवर्कों को ध्वस्त कर अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट की परिचालन क्षमता को कमजोर किया जाएगा और नशीले पदार्थों की अवैध खेप को भारत की सीमाओं तक पहुंचने से पहले ही रोकने का प्रयास किया जाएगा।
यह नया अभियान वैश्विक मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से भारत के सामने बढ़ते खतरे के बीच शुरू किया गया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, खुफिया जानकारी के प्रभावी उपयोग और समन्वित कार्रवाई के माध्यम से सीमा पार संचालित ड्रग तस्करी नेटवर्क पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।
