सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप के जरिए हजारों लोगों को फंसाया गया; विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म और म्यूल खातों से देश के बाहर निकाला गया पैसा

फर्जी निवेश ऐप, पार्ट-टाइम जॉब और दुबई वॉलेट का खेल: ₹900 करोड़ के साइबर घोटाले का पर्दाफाश

Team The420
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नई दिल्ली। देशभर में फैले एक बड़े संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर लोगों से करीब ₹900 करोड़ की ठगी का आरोप सामने आया है। मामले की जांच के दौरान कई राज्यों में 15 ठिकानों पर छापेमारी की गई और इस पूरे नेटवर्क के कथित सरगना अशोक कुमार शर्मा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क भारत के भीतर बैठकर विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म के जरिए पैसों की हेराफेरी करता था और ठगी की रकम को जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए विदेशों तक पहुंचा देता था।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब साइबर अपराध से जुड़े केंद्रीय तंत्र को बड़ी संख्या में ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब स्कैम की शिकायतें मिलने लगीं। शुरुआती जांच में एक संगठित नेटवर्क का पता चला, जिसके बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब समेत कई राज्यों में छापेमारी की कार्रवाई की गई।

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बिजवासन से चल रहा था ‘फ्रॉड ऑपरेशन’

जांच के दौरान पता चला कि इस नेटवर्क का संचालन दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर स्थित बिजवासन इलाके से किया जा रहा था। यहीं से पूरे गिरोह की गतिविधियों को संचालित किया जाता था, जिसे जांच में अनौपचारिक तौर पर “बिजवासन ग्रुप” कहा जा रहा है।

आरोप है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड था और वही पूरे सिस्टम की वित्तीय संरचना को संभालता था। बताया जा रहा है कि उसने ठगी की रकम को छिपाने और उसे विभिन्न चैनलों से बाहर भेजने के लिए कई जटिल वित्तीय तंत्र तैयार किए थे।

जांच में सामने आया कि गिरोह ने अब तक 15 शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाने और असली स्रोत छिपाने के लिए किया जाता था।

बताया जा रहा है कि इन कंपनियों के जरिए पैसे को पहले कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था और फिर अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से बाहर भेज दिया जाता था। इससे असली मनी ट्रेल को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता था।

ऐसे फंसाए जाते थे शिकार

जांच के अनुसार, गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर लोगों तक पहुंचता था।

लोगों को ऑनलाइन निवेश में भारी मुनाफे और घर बैठे पार्ट-टाइम जॉब का लालच दिया जाता था। शुरुआत में उन्हें कम रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था और फिर फर्जी डिजिटल डैशबोर्ड या स्क्रीनशॉट के जरिए लाभ दिखाया जाता था।

जब पीड़ितों को भरोसा हो जाता था, तब उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। कई मामलों में लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित है और उन्हें जल्द ही बड़ा मुनाफा मिलेगा।

लेकिन जैसे ही बड़ी रकम ट्रांसफर होती थी, नेटवर्क अचानक संपर्क तोड़ देता था और पीड़ितों का पैसा पूरी तरह गायब हो जाता था।

म्यूल खाते और विदेशी एटीएम से पैसा निकासी

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को पहले म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। ये खाते ऐसे लोगों के नाम पर खोले जाते थे जिन्हें असली नेटवर्क के बारे में बहुत कम जानकारी होती थी।

इसके बाद इन खातों से रकम को अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन वाले डेबिट कार्ड के जरिए विदेशों में एटीएम से निकाला जाता था।

इतना ही नहीं, कुछ रकम को विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म पर वॉलेट टॉप-अप के रूप में भेजा जाता था। यह ट्रांजैक्शन बैंकिंग सिस्टम में सामान्य POS ट्रांजैक्शन की तरह दिखाई देता था, जिससे असली लेनदेन को छिपाना आसान हो जाता था।

अंतरराष्ट्रीय फिनटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल

जांच में पाया गया कि इस नेटवर्क ने मुख्य रूप से दुबई आधारित एक विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।

इस प्लेटफॉर्म पर डिजिटल वॉलेट में पैसे ट्रांसफर कर उन्हें आगे दूसरे खातों या क्रिप्टो लेनदेन के जरिए घुमाया जाता था। इससे जांच एजेंसियों के लिए पैसे की असली दिशा का पता लगाना बेहद जटिल हो जाता था।

साइबर विशेषज्ञ की चेतावनी

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस तरह के साइबर गिरोह अब पारंपरिक बैंकिंग चैनलों के बजाय सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी निवेश स्कीम और विदेशी फिनटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, अपराधी पहले छोटे निवेश पर नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा बनाते हैं और फिर बड़ी रकम निकलवा लेते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना या पार्ट-टाइम जॉब ऑफर में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूर करें।

जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय कड़ियों की तलाश कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और नए वित्तीय खुलासे सामने आ सकते हैं।

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