₹397.23 करोड़ के कथित फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का आरोप; टैक्स चोरी पर कार्रवाई तेज

रेस्टोरेंट्स ने ₹408 करोड़ की बिक्री छिपाई, 63 हजार को नोटिस जारी

Team The420
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आयकर विभाग ने खानपान और रेस्टोरेंट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बिक्री छिपाने का मामला एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स की मदद से उजागर किया है। जांच में सामने आया कि देशभर के कई रेस्टोरेंट्स ने अपने बिक्री रिकॉर्ड में बदलाव किया, कुछ लेन-देन को पूरी तरह से दर्ज नहीं किया और खातों से डेटा हटा दिया। इस कार्रवाई में कुल 63 हजार रेस्टोरेंट्स को नोटिस जारी किया गया है।

1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के डेटा की AI जांच

जांच के दौरान 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स के डेटा की तुलना उनके आयकर रिटर्न में दर्शाई गई बिक्री से की गई। प्रारंभिक निष्कर्षों में लगभग ₹408 करोड़ की छुपाई गई बिक्री सामने आई। यह खुलासा 22 राज्यों के 46 शहरों में 62 रेस्टोरेंट्स के सर्वे अभियान के बाद हुआ।

आयकर विभाग ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि करदाताओं को स्वेच्छा से सही कर अनुपालन के लिए प्रेरित करना भी है। पहले चरण में नोटिस प्राप्त रेस्टोरेंट्स को ईमेल और संदेश भेजकर अपनी रिटर्न अपडेट करने का निर्देश दिया गया है।

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विशेषज्ञ चेतावनी: डिजिटल ट्रैकिंग से बचना असंभव

विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा-आधारित निगरानी और पारदर्शिता की पहल कर चोरी पर अंकुश लगाने में मदद करेगी। छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट्स के लिए यह एक चेतावनी भी है कि डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से किसी भी छुपाए गए लेन-देन का पता लगाया जा सकता है।

Shikha Singh, Senior Research Associate, Centre for Police Technology, ने कहा, “डाटा एनालिटिक्स और तकनीकी निगरानी की मदद से कर चोरी की घटनाओं को समय रहते पकड़ना संभव हो गया है। इससे न केवल कर अनुपालन बढ़ेगा बल्कि कारोबारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। रेस्टोरेंट्स को अपनी रिकॉर्डिंग और लेन-देन प्रणाली को नियमित रूप से अपडेट करना चाहिए।”

समय न देने पर सख्त कार्रवाई का संकेत

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि रेस्टोरेंट्स समय पर अपनी रिटर्न अपडेट नहीं करते हैं, तो विभाग सख्त दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है, जिसमें नोटिस, जुर्माना और कानूनी कदम शामिल होंगे। इस पहल से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि कर चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और किसी भी स्तर पर अंडर-रिपोर्टिंग अब डिजिटल निगरानी से पकड़ी जा सकती है।

कर विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसी घटनाओं की पहचान में प्रभावी साबित हो रहा है। इससे न केवल करदाताओं में सुधार होगा, बल्कि छोटे-छोटे फ्रॉड की घटनाओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा।

इस कदम से रेस्टोरेंट उद्योग और करदाताओं को यह स्पष्ट संदेश मिला कि पारदर्शिता और ईमानदारी अब डिजिटल निगरानी के तहत अनिवार्य हैं। भविष्य में ऐसी बड़ी घोटालेबाजी और बिक्री छुपाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

पूरा अभियान यह भी संकेत देता है कि तकनीक और निगरानी के माध्यम से सरकारी कर प्रणाली और जनता के बीच भरोसा बनाए रखना संभव है।

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