हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर तीन वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हुए कुल ₹4.4 करोड़ की ठगी कर ली। सामने आए मामलों में निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो ट्रेडिंग स्कैम जैसे तरीके सामने आए हैं। पीड़ितों में 62 वर्ष, 76 वर्ष और 69 वर्ष के तीन बुजुर्ग शामिल हैं, जिन्होंने हाल ही में साइबर अपराध इकाई में शिकायत दर्ज कराई है।
पहला मामला एक 62 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जिन्हें ऑनलाइन निवेश के नाम पर ₹1.72 करोड़ का नुकसान हुआ। शिकायत के अनुसार 9 जनवरी को उन्हें शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा एक संदेश मिला, जिसके बाद वे एक व्हाट्सऐप समूह से जुड़ गए। इस समूह में मौजूद लोग खुद को निवेश विशेषज्ञ बताते हुए ब्लॉक ट्रेड, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और आईपीओ अलॉटमेंट के जरिए बड़े मुनाफे का दावा कर रहे थे।
गिरोह ने पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि वह एक संस्थागत ट्रेडिंग खाते के माध्यम से निवेश कर रहा है, जिससे उसे सामान्य निवेशकों की तुलना में अधिक लाभ मिल सकता है। शुरुआत में पीड़ित ने ₹5 लाख एक बैंक खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद उसे एक वेबसाइट और ऑनलाइन डैशबोर्ड दिखाया गया जिसमें लगातार बढ़ता हुआ लाभ दिखाई दे रहा था।
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14 जनवरी से 9 मार्च के बीच पीड़ित ने कुल 25 से अधिक लेनदेन किए और विभिन्न बैंक खातों तथा यूपीआई आईडी में कुल ₹1,71,74,000 ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में भरोसा बढ़ाने के लिए अपराधियों ने ₹1,000 की छोटी राशि निकालने की अनुमति भी दी। इसके बाद वेबसाइट पर खाते का मूल्य बढ़कर कथित तौर पर ₹32.53 करोड़ दिखाया जाने लगा।
जब पीड़ित ने इस राशि को निकालने की कोशिश की, तो उससे ₹65 लाख का कमीशन मांगा गया। भुगतान के बाद भी निकासी का विकल्प बंद कर दिया गया और आरोपियों ने संपर्क करना बंद कर दिया, जिसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
दूसरा मामला तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” से जुड़ा है, जिसमें 76 वर्षीय एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को ₹80 लाख का नुकसान हुआ। शिकायत के अनुसार 5 मार्च को उन्हें एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड से मुंबई में एक सिम कार्ड खरीदा गया था, जिसका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और आपत्तिजनक विज्ञापनों के प्रचार में किया गया।
इसके बाद पीड़ित को यह कहकर डराया गया कि उसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है। कॉल के दौरान अन्य लोग भी जुड़े, जिन्होंने खुद को जांच अधिकारी और अदालत से संबंधित अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पेश किया। पीड़ित को नकली दस्तावेज दिखाकर यह विश्वास दिलाया गया कि मामला गंभीर है और जांच के लिए उसे पैसे जमा कराने होंगे। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने विभिन्न माध्यमों से कुल ₹80 लाख ट्रांसफर कर दिए।
तीसरा मामला क्रिप्टो ट्रेडिंग धोखाधड़ी का है, जिसमें 69 वर्षीय एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से ₹1.89 करोड़ की ठगी की गई। पीड़ित ने बताया कि 20 नवंबर को उन्होंने इंस्टाग्राम पर एआई-आधारित ट्रेडिंग सेवा का विज्ञापन देखा था। इसके बाद महेश्वरी नाम बताने वाली एक महिला ने उनसे संपर्क किया और खुद को निवेश सलाहकार बताया।
उसने पीड़ित को एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा और शुरुआत में ₹23,000 जमा कराने को कहा। ऐप पर छोटे-छोटे मुनाफे दिखाए गए और ₹276 की एक छोटी निकासी की अनुमति दी गई, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया। धीरे-धीरे पीड़ित ने बड़ी रकम जमा कर दी और दिसंबर तक उसके खाते में कथित रूप से ₹83 लाख से अधिक का लाभ दिखाया गया।
जब पीड़ित ने लगभग ₹74 लाख निकालने की कोशिश की, तो प्लेटफॉर्म ने अलग-अलग नामों से शुल्क मांगना शुरू कर दिया। इसमें 8 प्रतिशत कन्वर्जन फीस, कैपिटल गेन टैक्स, ट्रांजैक्शन फीस, गैस फीस, क्रिप्टो टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, स्वैप चार्ज और विदेशी लेनदेन शुल्क शामिल थे। पीड़ित ने कई भुगतान किए, लेकिन उसे राशि निकालने की अनुमति नहीं दी गई।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस तरह के मामलों में साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का सहारा लेते हैं। उनके अनुसार अपराधी लोगों के डर, लालच और जल्द मुनाफा पाने की मानसिकता का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं।
संबंधित साइबर अपराध इकाई ने तीनों मामलों में मुकदमा दर्ज कर लिया है और डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जांच की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, निवेश ऑफर या ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।
