हैदराबाद: शेयर बाजार में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच एक 27 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने खुद को स्टॉक ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर पहले छोटे निवेश पर फर्जी मुनाफा दिखाया और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए भरोसे में लिया। पीड़ित ने नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान अलग-अलग बैंक खातों में 52 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹2.4 करोड़ से अधिक रकम भेज दी। बाद में जब उसने अपना पैसा निकालने की कोशिश की तो ट्रेडिंग अकाउंट में निगेटिव बैलेंस दिखाई देने लगा। इसके बाद ठगों ने संपर्क बंद कर दिया।
गांडीपेट निवासी पीड़ित की शिकायत पर साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने बुधवार को मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई। पीड़ित ने बताया कि उसे ईमेल और Telegram के जरिए कुछ लोगों ने संपर्क किया। उन्होंने खुद को शेयर बाजार में ट्रेडिंग और निवेश के विशेषज्ञ के तौर पर पेश किया और बड़े रिटर्न का भरोसा दिलाया।
शुरुआत में पीड़ित ने उनके बताए तरीके पर ₹2 लाख का निवेश किया। इसके बाद संबंधित ट्रेडिंग ऐप पर उसके खाते में करीब ₹5 लाख का मुनाफा दिखाई देने लगा। ठगों ने इसे वास्तविक ट्रेडिंग से मिला लाभ बताया। इससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया। उसने आगे ₹5 लाख का निवेश किया और कुछ ही दिनों में उसके खाते में करीब ₹9.5 लाख का रिटर्न दिखाया गया।
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फर्जी मुनाफे का सिलसिला बढ़ने के साथ ठगों ने पीड़ित को अधिक रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शिकायत के मुताबिक, 20 नवंबर से 31 दिसंबर के बीच उसने अलग-अलग बैंक खातों में 52 बार रकम ट्रांसफर की। इन सभी लेनदेन में कुल राशि ₹2.4 करोड़ से अधिक थी। पीड़ित ने यह रकम जुटाने के लिए कर्ज भी लिया था।
जब उसे लगा कि अब निवेश की रकम और मुनाफा आसानी से वापस मिल जाएगा, तब उसने पैसे निकालने का प्रयास किया। इसी दौरान ट्रेडिंग अकाउंट में अचानक निगेटिव बैलेंस दिखाई देने लगा। इसके बाद कथित ठगों ने जवाब देना बंद कर दिया। ऐप के ग्रुप चैट में भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली और Telegram पर हुई बातचीत का इतिहास भी कथित तौर पर हटा दिया गया।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि संपर्क करने की कई कोशिशों के बावजूद आरोपियों से बात नहीं हो सकी। बाद में उसे यह भी पता चला कि जिस Exness ऐप के जरिए ट्रेडिंग कराई जा रही थी, उसे Google Play Store से हटा दिया गया था और उस पर धोखाधड़ी से जुड़ी कार्रवाई की गई थी। इसके बाद पीड़ित ने बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रकम वापस हासिल करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
पीड़ित ने 27 जुलाई को National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बुधवार को साइबराबाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दी गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) और 3(5) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-D के तहत केस दर्ज किया है।
यह मामला ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के उस तरीके को सामने लाता है जिसमें ठग शुरुआत में पीड़ित को वास्तविक मुनाफे जैसा दिखाई देने वाला आंकड़ा दिखाकर उसका भरोसा जीतते हैं। इसके बाद निवेश की रकम बढ़वाई जाती है। जब पीड़ित बड़ी राशि जमा कर देता है और निकासी की मांग करता है, तो फर्जी प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त शुल्क, टैक्स, नकारात्मक बैलेंस या अन्य तकनीकी अड़चन दिखाकर उसे उलझाया जाता है। अंत में आरोपी संपर्क तोड़ देते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बातचीत या अन्य सबूत हटाने की कोशिश करते हैं।
पुलिस अब रकम जिन बैंक खातों में ट्रांसफर हुई, उनकी जांच के साथ संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म, Telegram संपर्कों और लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच का उद्देश्य ठगी में इस्तेमाल खातों और आरोपियों की पहचान कर धन के प्रवाह का पता लगाना है।
