चंडीगढ़। अपराधी जिस तेजी से तकनीक और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसके मुकाबले पुलिस की जांच क्षमता को आगे रखने के लिए हरियाणा पुलिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी में है। प्रस्तावित टास्क फोर्स का उद्देश्य पुलिसिंग में AI का व्यावहारिक और सुरक्षित इस्तेमाल बढ़ाना तथा जांच अधिकारियों को बड़े पैमाने पर उपलब्ध डिजिटल डेटा का तेजी से विश्लेषण करने में सक्षम बनाना है।
टास्क फोर्स मौजूदा पुलिस प्रणालियों में AI आधारित समाधान लागू करने और अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर काम करेगी। इसके दायरे में डेटा एनालिटिक्स, साइबर अपराध की जांच, डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण, दस्तावेजों की प्रोसेसिंग, अपराध के पैटर्न की पहचान और जटिल मामलों में महत्वपूर्ण सुराग तलाशने जैसे काम शामिल किए जा सकते हैं।
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, AI का इस्तेमाल मानव विशेषज्ञता का विकल्प बनाने के लिए नहीं बल्कि जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। प्रस्तावित टास्क फोर्स की अगुवाई IPS स्तर के अधिकारी करेंगे, जिन्हें राज्य का AI Officer नामित किया गया है।
पुलिस का जोर इस बात पर भी रहेगा कि AI आधारित प्रणालियां केवल तकनीकी रूप से सक्षम ही नहीं हों, बल्कि उनकी सटीकता, पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और मानव निगरानी सुनिश्चित की जाए। जांच में AI से मिलने वाले निष्कर्षों को अंतिम निर्णय का आधार बनाने से पहले मानवीय स्तर पर सत्यापन और जांच की व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।
वित्तीय ट्रेल की जांच में AI का इस्तेमाल
साइबर अपराध की जांच में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा का विश्लेषण करना है। बैंक खातों में लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड, ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध वित्तीय ट्रांजेक्शन की संख्या अधिक होने के कारण जांच अधिकारियों को महत्वपूर्ण कड़ियां तलाशने में काफी समय लग सकता है।
इसी चुनौती को देखते हुए हरियाणा पुलिस AI-assisted Financial Trail Analysis पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के बीच संबंधों की पहचान करना, ट्रांजेक्शन के पैटर्न का विश्लेषण करना, रकम के संभावित प्रवाह को समझना और जांच अधिकारियों के सामने महत्वपूर्ण कड़ियों को तेजी से रखना है।
AI की मदद से बड़ी मात्रा में डेटा का प्रारंभिक विश्लेषण कम समय में किया जा सकेगा। इससे जांच अधिकारी डेटा छांटने में लगने वाले समय को कम करके महत्वपूर्ण सुरागों के सत्यापन, संदिग्धों से पूछताछ और अन्य मानवीय जांच प्रक्रियाओं पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
अपराध के पैटर्न पहचानने में मदद
प्रस्तावित व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वित्तीय अपराधों तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर अपराध के दोहराए जाने वाले पैटर्न, आपराधिक गतिविधियों के बीच संभावित संबंध और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने लाने में AI की मदद ली जा सकती है।
दस्तावेजों की प्रोसेसिंग और सूचनाओं को व्यवस्थित करने में भी AI आधारित प्रणालियां पुलिस के काम को तेज कर सकती हैं। इससे अलग-अलग मामलों से संबंधित सूचनाओं को एक साथ देखने और जांच की दिशा तय करने में अधिकारियों को सहायता मिल सकती है।
हरियाणा पुलिस पहले से नागरिक शिकायतों, FIR और वित्तीय अपराधों से संबंधित डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर रही है। अब इन प्रणालियों को AI की मदद से और अधिक व्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
राज्य पुलिस के स्तर पर इन-हाउस Grievance Management System और Court Returns Portal जैसे डिजिटल समाधान भी विकसित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य शिकायतों, अदालत से संबंधित सूचनाओं, डेटा प्रोसेसिंग और आवश्यक फॉलो-अप को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
पुलिस के लिए AI का बढ़ता इस्तेमाल ऐसे समय में हो रहा है जब साइबर अपराधों में डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रस्तावित टास्क फोर्स तकनीक को जांच प्रक्रिया से जोड़ने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी कि AI से मिली जानकारी का इस्तेमाल पारदर्शी, सुरक्षित और मानवीय निगरानी के तहत किया जाए।
