ग्वालियर। निवेश के नाम पर ग्वालियर के एक कारोबारी से ₹1.63 करोड़ की साइबर ठगी के मामले की जांच करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में एक ऐसे बैंक खाते का पता चला है, जिसमें सात राज्यों में हुई कथित साइबर ठगी से जुड़ी रकम पहुंचने के संकेत मिले हैं। इसी खाते में ग्वालियर के कारोबारी से ठगी गई रकम में से करीब ₹11 लाख भी ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस इस खाते को साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों की महत्वपूर्ण कड़ी मानकर जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद जुबेर, समीर और बिलाल सैफी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, मोहम्मद जुबेर ‘जुबेर टेलीकॉम मेरठ’ नाम की फर्म का निदेशक है। जांच में सामने आया है कि इसी फर्म का बैंक खाता कथित तौर पर साइबर ठगों को उपलब्ध कराया गया था। आरोप है कि इसके बदले खाते के इस्तेमाल के लिए जुबेर को प्रतिदिन ₹5,000 देने का सौदा हुआ था।
मामला ग्वालियर के बहोड़ापुर क्षेत्र के कारोबारी मनीष जैन से जुड़ा है। आरोप है कि 22 अप्रैल से 20 जुलाई के बीच निवेश में मुनाफे का लालच देकर उनसे अलग-अलग चरणों में कुल ₹1.63 करोड़ की रकम ठग ली गई। शिकायत के बाद पुलिस ने रकम के लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल संपर्कों की जांच शुरू की। इसी दौरान ठगी की रकम के एक हिस्से का रास्ता मेरठ स्थित बैंक खाते तक पहुंचा।
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जांच में पता चला कि करीब ₹11 लाख इंडसइंड बैंक की मेरठ शाखा में संचालित चालू खाते में भेजे गए थे। यह खाता ‘जुबेर टेलीकॉम मेरठ’ के नाम से पंजीकृत था। बैंक लेनदेन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद जांच टीम मेरठ पहुंची और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि मोहम्मद जुबेर ने अपने चचेरे भाई समीर के कहने पर फर्म का बैंक खाता बिलाल सैफी को उपलब्ध कराया था। आरोप है कि खाते को साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को इस खाते में आने वाली रकम के वास्तविक स्रोत की कितनी जानकारी थी और नेटवर्क में उनकी भूमिका किस स्तर तक थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, खाते में केवल ग्वालियर की ठगी से जुड़ी रकम ही नहीं पहुंची, बल्कि सात राज्यों में हुई कथित साइबर ठगी से संबंधित धनराशि के लेनदेन के भी संकेत मिले हैं। पुलिस बैंक खाते की पूरी लेनदेन श्रृंखला खंगाल रही है। इसमें रकम भेजने वाले खातों, लाभार्थी खातों और धनराशि को आगे स्थानांतरित करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है।
जांच में दिल्ली से भी नेटवर्क के तार जुड़ने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी दिल्ली के आदर्श नगर स्थित एक होटल में ठहरे थे। इसी दौरान पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपी अविनाश राय के बैंक खाते से ठगी की रकम जुबेर टेलीकॉम के खाते में पहुंची थी। इसके बाद आरोप है कि बिलाल ने दिल्ली में संपर्क में आए एक व्यक्ति की मदद से रकम को दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित किया।
पुलिस को बिलाल सैफी के वाट्सऐप संपर्कों की जांच के दौरान ‘साधू’ नाम के एक व्यक्ति के बारे में भी जानकारी मिली है। आरोप है कि साधू ने बिलाल और उसके साथियों को दिल्ली बुलाया था। पुलिस अब उसकी वास्तविक पहचान, भूमिका और कथित साइबर ठगी नेटवर्क से उसके संबंधों की जांच कर रही है। उसके संपर्क में रहे लोगों और डिजिटल संचार की भी पड़ताल की जा रही है।
म्यूल बैंक खाते साइबर ठगी के मामलों में अक्सर रकम की आवाजाही छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे खातों में पीड़ितों से ठगी गई रकम पहुंचने के बाद उसे तेजी से दूसरे खातों में स्थानांतरित किया जा सकता है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जुबेर टेलीकॉम के खाते के जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसमें कितने लोगों की भूमिका रही।
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, वाट्सऐप संपर्क, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है। साथ ही सात राज्यों से जुड़े संभावित मामलों और दिल्ली नेटवर्क के बीच संबंधों को भी खंगाला जा रहा है। जांच का मुख्य लक्ष्य कथित नेटवर्क के उन सदस्यों तक पहुंचना है, जो ठगी की रकम जुटाने, खातों की व्यवस्था करने और उसे अलग-अलग खातों में भेजने में शामिल रहे हैं।
