गुरुग्राम: फ्लैट खरीदने से पहले बैंक लोन की स्थिति की जांच नहीं करना एक खरीदार को भारी पड़ गया। गुरुग्राम पुलिस ने फ्लैट बिक्री में कथित धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली के एक दंपती को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पति-पत्नी ने बैंक का लोन बकाया होने की जानकारी छिपाकर और फर्जी बैंक दस्तावेज दिखाकर शिकायतकर्ता से ₹1.10 करोड़ की रकम हासिल कर ली। बाद में बैंक से सत्यापन कराने पर पता चला कि फ्लैट पर अभी भी ₹35.70 लाख का लोन बकाया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी भानु प्रिया नारंग और उसके पति ध्रुव शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने सुशांत लोक फेज-2 स्थित एक फ्लैट को शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी को ₹1.10 करोड़ में बेचने का सौदा किया था। बातचीत के दौरान आरोपियों ने खरीदार को बताया कि फ्लैट पर बैंक का लोन चल रहा है, लेकिन वे इसे जल्द चुका देंगे। इसके बाद बैंक से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
फर्जी बैंक स्टेटमेंट दिखाकर हासिल किया भरोसा
शिकायत के अनुसार, आरोपियों की बात पर विश्वास करते हुए खरीदार ने अलग-अलग तारीखों में पूरी रकम दोनों को दे दी। पुलिस के मुताबिक, रकम हासिल करने से पहले आरोपियों ने लोन चुकता होने का भरोसा मजबूत करने के लिए कथित तौर पर बैंक स्टेटमेंट और फोरक्लोजर से संबंधित फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाए।
शिकायतकर्ता को लगा कि बैंक का बकाया समाप्त हो चुका है और जल्द ही फ्लैट के मूल दस्तावेज तथा NOC मिल जाएंगे। इसी दौरान 23 जनवरी 2025 को फ्लैट की बिक्री का विलेख शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी के नाम कर दिया गया।
बाद में जब खरीदार ने बैंक से फ्लैट की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया तो मामला सामने आया। बैंक रिकॉर्ड में करीब ₹35.70 लाख का लोन अभी भी बकाया मिला। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया और आरोप लगाया कि उसे गलत जानकारी और फर्जी दस्तावेज के जरिए संपत्ति खरीदने के लिए राजी किया गया।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के अनुसार, शिकायत 4 अप्रैल को दी गई थी। मामले की जांच के बाद सेक्टर-56 थाने में धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की भूमिका और उनके द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों की भी पड़ताल की।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को मंगलवार रात दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित फर्जी बैंक स्टेटमेंट और फोरक्लोजर स्क्रीनशॉट किस तरह तैयार किए गए थे और क्या इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका थी।
प्रॉपर्टी खरीदते समय दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच जरूरी
ऐसे मामलों में केवल विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट या भुगतान संबंधी दस्तावेजों पर भरोसा करना खरीदार के लिए जोखिम भरा हो सकता है। बैंक से सीधे लोन की स्थिति, बकाया राशि, फोरक्लोजर प्रक्रिया और NOC की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होता है। साथ ही, संपत्ति के मूल दस्तावेजों और रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच भी जरूरी है।
गुरुग्राम पुलिस अब मामले में वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और आरोपियों द्वारा दिए गए कथित फर्जी स्क्रीनशॉट की जांच कर रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
