रियलमी, ओप्पो और वनप्लस के सैकड़ों मोबाइल हैंडसेट रहस्यमय ढंग से गायब; चालक और खलासी फरार, कई राज्यों में फैली जांच

नोएडा से गुवाहाटी जा रहे कंटेनर से ₹12 करोड़ के स्मार्टफोन गायब: बिहार में लावारिस मिली गाड़ी, अंतरराज्यीय गिरोह पर शक

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By Roopa
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पूर्णिया/अररिया। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से असम के गुवाहाटी के लिए रवाना हुए करोड़ों रुपये मूल्य के स्मार्टफोन से भरे एक कंटेनर से बड़े पैमाने पर माल गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लगभग ₹12 करोड़ कीमत के मोबाइल फोन की खेप लेकर निकला कंटेनर बिहार के अररिया जिले में लावारिस हालत में मिला, जबकि उसमें लदे सैकड़ों मोबाइल हैंडसेट गायब पाए गए। इस घटना ने परिवहन सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स निगरानी व्यवस्था और अंतरराज्यीय संगठित अपराध को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, कंटेनर में रियलमी, ओप्पो और वनप्लस जैसे प्रमुख ब्रांडों के महंगे स्मार्टफोन लदे हुए थे। यह खेप 6 जून को ग्रेटर नोएडा स्थित वेयरहाउस से गुवाहाटी के लिए रवाना हुई थी। परिवहन के लिए एक निजी ट्रांसपोर्टर की सेवाएं ली गई थीं और वाहन को दो चालक लेकर निकले थे। शुरुआती यात्रा सामान्य रही, लेकिन अगले ही दिन से दोनों चालक संपर्क से बाहर बताए गए, जिससे संदेह और गहरा गया।

जांच में सामने आया है कि कंटेनर निर्धारित मार्ग से हट गया था। फास्टैग डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि वाहन ने अंतिम बार एक टोल प्लाजा पार किया था, जिसके बाद उसकी गतिविधियों में असामान्य बदलाव दिखाई दिए। जांचकर्ताओं को आशंका है कि आरोपियों ने टोल निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए मुख्य राजमार्ग छोड़कर वैकल्पिक और कम निगरानी वाले रास्तों का इस्तेमाल किया।

कुछ दिनों बाद अररिया नगर थाना क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप के पास संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ा कंटेनर बरामद हुआ। स्थानीय पुलिस ने जब वाहन की तलाशी ली तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार कंटेनर में कुल 1,143 मोबाइल पैकेट होने चाहिए थे, लेकिन जांच के दौरान केवल 531 पैकेट ही मिले। शेष 612 पैकेट गायब पाए गए, जिनकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि कंटेनर का सील बिहार पहुंचने से पहले ही तोड़ दिया गया था। विभिन्न टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल ट्रैकिंग डेटा की समीक्षा के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि वाहन का लॉक रास्ते में ही खोला गया था। अधिकारियों को संदेह है कि चोरी की वारदात उत्तर प्रदेश के किसी हिस्से में अंजाम दी गई और बाद में खाली या आंशिक रूप से खाली कंटेनर को बिहार में छोड़ दिया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। जांच का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ है क्योंकि वाहन उत्तर प्रदेश, बिहार और असम से जुड़े मार्ग पर चल रहा था, जबकि चालक हरियाणा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। जांच टीम मोबाइल फोन की सप्लाई चेन, परिवहन दस्तावेजों, जीपीएस रिकॉर्ड और टोल डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि वाहन की गतिविधियों में अयोध्या और गोरखपुर के बीच असामान्य देरी दर्ज की गई थी। अधिकारियों को आशंका है कि इसी अवधि में मोबाइल फोन के पैकेट कंटेनर से निकाले गए हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि चोरी में केवल चालक दल शामिल था या किसी संगठित अंतरराज्यीय गिरोह ने पूरी साजिश को अंजाम दिया।

सूत्रों के अनुसार, फरार चालक और खलासी की तलाश के लिए विभिन्न राज्यों में पुलिस टीमों को भेजा गया है। उनके मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं, जिससे उनकी भूमिका को लेकर संदेह और बढ़ गया है। जांच एजेंसियां उनके संपर्कों, वित्तीय लेन-देन और संभावित सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

मामले ने परिवहन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी को पूर्व में भी परिवहन के दौरान मोबाइल फोन चोरी होने का नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बावजूद कथित तौर पर अत्याधुनिक डिजिटल सुरक्षा उपायों का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान के परिवहन में रियल-टाइम ट्रैकिंग, डिजिटल लॉकिंग सिस्टम, जियो-फेंसिंग और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बेहद आवश्यक है।

फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में समन्वित कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि उन्हें कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है। करोड़ों रुपये की इस रहस्यमय चोरी ने देशभर में लॉजिस्टिक्स सुरक्षा और माल परिवहन व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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