नई दिल्ली। ऑनलाइन निवेश और वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर चल रहे साइबर ठगी के जाल का एक और बड़ा मामला सामने आया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी से कथित तौर पर ₹15.74 लाख की ठगी करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने पहले पीड़ित को छोटे-छोटे मुनाफे का लालच देकर विश्वास में लिया और फिर विभिन्न निवेश योजनाओं के नाम पर लगातार रकम जमा कराते रहे। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस निकालने की कोशिश की तो उससे अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई, जिसके बाद उसे ठगी का अहसास हुआ।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा निवासी संदीप सैन (30) और परिक्षित (23) तथा राजस्थान निवासी सचिन झक्कर (25) के रूप में हुई है। साइबर जांच के बाद तीनों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की ठगी की घटनाओं में शामिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित ने पिछले वर्ष जुलाई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसे व्हाट्सऐप के माध्यम से कुछ लोगों ने संपर्क किया। इन लोगों ने स्वयं को एक ऐसी कंपनी का प्रतिनिधि बताया जो प्रॉपर्टी रेंटल रेटिंग और लीजिंग से जुड़े वर्क-फ्रॉम-होम कार्य उपलब्ध कराती है। शुरुआत में बातचीत पूरी तरह पेशेवर दिखाई गई, जिससे पीड़ित को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।
इसके बाद उसे एक टेलीग्राम समूह में जोड़ा गया, जहां कथित तौर पर प्रशिक्षण दिया गया और कई वेबसाइटों पर पंजीकरण करवाया गया। आरोपियों ने उसे विभिन्न ऑनलाइन टास्क पूरे करने के लिए कहा। शुरुआती चरण में टास्क पूरा करने और कुछ रकम जमा करने पर उसे मामूली मुनाफा भी मिला। यही रणनीति पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए अपनाई गई थी।
जैसे-जैसे विश्वास बढ़ता गया, आरोपियों ने अधिक लाभ देने वाले निवेश विकल्पों की पेशकश शुरू कर दी। “चार्टर लीज”, “बोनस टास्क” और अन्य विशेष योजनाओं का हवाला देकर पीड़ित को बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया। हर बार यह भरोसा दिलाया गया कि निवेश पर आकर्षक रिटर्न मिलेगा और पैसा कभी भी निकाला जा सकेगा।
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पीड़ित ने कथित तौर पर कई बार अलग-अलग खातों और माध्यमों से रकम ट्रांसफर की। कुछ समय बाद उसके ऑनलाइन खाते में बड़ी राशि दिखाई देने लगी, जिससे उसे लगा कि उसका निवेश सफल रहा है। लेकिन जब उसने उस राशि को निकालने का प्रयास किया तो कथित ठगों ने नया बहाना सामने रखा।
आरोपियों ने कहा कि खाते में दिखाई दे रही राशि निकालने के लिए उसे “विथड्रॉल पेनल्टी” के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यह रकम खाते में प्रदर्शित शेष राशि के लगभग 50 प्रतिशत के बराबर बताई गई। उस समय तक पीड़ित कुल ₹15.74 लाख जमा कर चुका था। इसके बावजूद उसे न तो कोई भुगतान मिला और न ही जमा की गई रकम वापस लौटाई गई।
काफी समय तक टालमटोल और नई मांगों के बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का शिकार बन चुका है। इसके बाद उसने संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच के दौरान तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई। जांच के आधार पर पहले एक आरोपी को हरियाणा के करनाल से पकड़ा गया, जबकि अन्य दो आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया गया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। शुरुआत में छोटे लाभ दिखाकर पीड़ित को बड़े निवेश के लिए तैयार किया जाता है और बाद में निकासी शुल्क, टैक्स या पेनल्टी जैसे बहाने बनाकर लगातार धन वसूला जाता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान निवेश योजना, टेलीग्राम समूह या व्हाट्सऐप आधारित कमाई के प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच अवश्य करें।
मामले की जांच जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार अन्य साइबर ठगी मामलों से भी जुड़े हो सकते हैं।
