देवास के कारोबारी प्रेम कुमार अग्रवाल की मौत ने लिया नया मोड़; परिवार ने मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक नुकसान के आरोप उठाए, पुलिस ने जांच तेज की

कॉलोनाइजर की संदिग्ध मौत के बाद वायरल हुआ कथित सुसाइड नोट: बेटे ने ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया, नामजद लोगों पर कार्रवाई की मांग

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By Roopa
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देवास। मध्य प्रदेश के देवास में प्रतिष्ठित कॉलोनाइजर प्रेम कुमार अग्रवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने नया मोड़ ले लिया है। घटना के एक दिन बाद सोशल मीडिया पर एक कथित सुसाइड नोट सामने आने के बाद मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया है। मृतक के बेटे विनायक अग्रवाल ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर पिता को न्याय दिलाने की मांग की है और आरोप लगाया है कि उनके पिता लंबे समय से गंभीर आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे थे। पुलिस ने वायरल दस्तावेज की जांच शुरू कर दी है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार को प्रेम कुमार अग्रवाल की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए इंदौर ले जाया जा रहा था। रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जानकारी में जहरीले पदार्थ के सेवन की आशंका जताई गई थी। शुक्रवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन इसी दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित सुसाइड नोट ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।

वायरल हो रहे कथित नोट में कुछ व्यक्तियों के नामों का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है। दस्तावेज में मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक विवाद और कथित वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मुद्दों का जिक्र बताया जा रहा है। सबसे गंभीर दावा लगभग ₹100 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसे मृतक की परेशानी का प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक नोट की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसकी जांच जारी है।

मृतक के पुत्र विनायक अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके पिता पिछले काफी समय से तनाव में थे। उनके अनुसार, परिवार को सभी परिस्थितियों की पूरी जानकारी नहीं थी क्योंकि प्रेम कुमार अग्रवाल अपनी परेशानियों को खुलकर साझा नहीं करते थे। विनायक ने दावा किया कि उनके पिता कुछ लोगों के व्यवहार और आर्थिक विवादों के कारण लगातार मानसिक दबाव में थे।

उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कथित सुसाइड नोट में जिन लोगों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका जांच में सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। विनायक अग्रवाल ने यह भी बताया कि अंतिम समय में उनके पिता ने उन्हें एक दस्तावेज सौंपा था और संकेत दिया था कि उसमें कुछ महत्वपूर्ण नाम दर्ज हैं।

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परिवार के आरोपों के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग भी घटना पर नजर बनाए हुए हैं। प्रेम कुमार अग्रवाल को क्षेत्र के प्रमुख कॉलोनाइजरों में गिना जाता था और उनकी अचानक मृत्यु ने कारोबारी समुदाय को भी झकझोर दिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच एजेंसियां वायरल सुसाइड नोट की सत्यता, उसमें किए गए दावों और उसमें कथित रूप से उल्लिखित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। साथ ही मृतक के वित्तीय लेन-देन, कारोबारी विवादों और हाल के घटनाक्रमों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कथित सुसाइड नोट को जांच का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, लेकिन उसकी प्रमाणिकता की पुष्टि आवश्यक होती है। हस्तलेखन, डिजिटल साक्ष्य, परिस्थितिजन्य तथ्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही उसकी वैधता तय की जाती है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, परिवार न्याय की मांग पर अडिग है और पूरे मामले की गहन जांच की अपेक्षा कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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