गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस ने कथित साइबर ठगी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एक महिला को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी महिला पर फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराने और विभिन्न राज्यों में हुई ऑनलाइन ठगी की रकम को इन खातों के माध्यम से स्थानांतरित करने का आरोप है। मामले में महिला के पति और कंपनी के दूसरे निदेशक समेत अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान सहजनवा क्षेत्र निवासी मनीषा प्रजापति के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि ‘नंदिनी माइक्रो फाइनेंस फाउंडेशन’ के नाम से कथित रूप से एक फर्जी संस्था का उपयोग कर बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे। आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश और अधिक मुनाफे का झांसा देकर लोगों से ठगी गई रकम को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
साइबर सेल की जांच के दौरान इंडसइंड बैंक की गोलघर शाखा में संचालित एक बैंक खाते का विश्लेषण किया गया। जांच एजेंसियों को इस खाते का संबंध देशभर में दर्ज कम से कम 21 साइबर ठगी शिकायतों से मिला। पुलिस के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गोवा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के पीड़ितों से जुड़े वित्तीय लेनदेन इस खाते के माध्यम से किए जाने के संकेत मिले हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिस पते पर ‘नंदिनी माइक्रो फाइनेंस फाउंडेशन’ का पंजीकरण दर्शाया गया था, वहां किसी प्रकार की माइक्रो फाइनेंस गतिविधि संचालित नहीं मिली। अधिकारियों का मानना है कि संस्था का उपयोग कथित रूप से केवल बैंक खाते खोलने और साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां अब आरोपी महिला के पति श्याम कुमार प्रजापति, जो कंपनी का दूसरा निदेशक बताया जा रहा है, की तलाश कर रही हैं। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े सभी बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी है।
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी मनीषा प्रजापति और उसके पति के विरुद्ध पहले से भी धोखाधड़ी से जुड़े मामले दर्ज हैं। इसके अलावा हरियाणा, नोएडा, पुणे और बेंगलुरु के साइबर क्राइम थानों में भी इसी बैंक खाते से संबंधित शिकायतें और मुकदमे दर्ज पाए गए हैं। पुलिस विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे नेटवर्क की गतिविधियों का पता लगा रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर फर्जी कंपनियों, स्वयंसेवी संस्थाओं या माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल करते हैं, ताकि ठगी की रकम के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों को छिपाया जा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था में निवेश या भुगतान करने से पहले उसके पंजीकरण, कार्यालय, बैंकिंग विवरण और नियामकीय वैधता का स्वतंत्र सत्यापन करना आवश्यक है।
पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल उपकरणों तथा वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सभी आरोप फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
