एर्नाकुलम पुलिस ने गो फर्स्ट के पूर्व निदेशक मंडल, DGCA के एक अज्ञात अधिकारी, EaseMyTrip, Cleartrip और एयरलाइन के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि वर्ष 2023 में दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लेने के बाद भी लगभग दो सप्ताह तक टिकटों की बिक्री जारी रखी गई, जिससे लाखों यात्रियों को कथित रूप से आर्थिक नुकसान हुआ।
नई दिल्ली: गो फर्स्ट एयरलाइन के दिवाला (इंसॉल्वेंसी) मामले में एर्नाकुलम पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए बंद हो चुकी एयरलाइन के पूर्व निदेशक मंडल, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के एक अज्ञात अधिकारी, ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग प्लेटफॉर्म EaseMyTrip और Cleartrip तथा एयरलाइन के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। आरोप है कि एयरलाइन द्वारा स्वैच्छिक दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लेने के बावजूद यात्रियों को टिकट बेचे जाते रहे, जिससे उन्हें कथित रूप से वित्तीय नुकसान हुआ।
9 जुलाई को दर्ज FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 406, 415 और 420 के तहत दर्ज की गई है। यह कार्रवाई एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय के निर्देश के बाद की गई, जहां विमानन सुरक्षा कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता यशवंत शेनॉय ने शिकायत दायर कर आरोप लगाया था कि संबंधित पक्षों ने दिवाला प्रक्रिया की जानकारी होने के बावजूद टिकट बिक्री जारी रखकर यात्रियों के साथ कथित धोखाधड़ी की।
शिकायत के अनुसार, गो फर्स्ट के निदेशक मंडल ने 28 अप्रैल 2023 को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया, 30 अप्रैल को शेयरधारकों से इसकी मंजूरी प्राप्त की और 2 मई 2023 को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के समक्ष दिवाला याचिका दायर की। इसके बावजूद 10 मई तक टिकटों की बुकिंग जारी रही और बड़ी संख्या में यात्रियों ने उन उड़ानों के लिए टिकट खरीदे जो बाद में रद्द कर दी गईं।
FIR में पूर्व चेयरमैन नुस्ली नेविल वाडिया, निदेशक नेस नुस्ली वाडिया, पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कौशिक खोना, उस समय के अन्य सभी निदेशक, DGCA के एक अज्ञात अधिकारी, EaseMyTrip, Cleartrip तथा रेजोल्यूशन प्रोफेशनल शैलेंद्र अजमेरा को नामजद किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उन्होंने दिवाला याचिका दायर किए जाने वाले दिन ही अपने परिवार और मित्रों के लिए कोच्चि-मुंबई यात्रा के टिकट बुक किए थे, जिससे उन्हें ₹64,000 का नुकसान हुआ। उनका यह भी आरोप है कि टिकट बिक्री जारी रहने की जानकारी उन्होंने कई बार DGCA को दी, लेकिन नियामक ने केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 10 मई को जाकर एयरलाइन को अग्रिम टिकट बिक्री रोकने का निर्देश दिया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि DGCA एयरलाइन की वित्तीय स्थिति से अवगत होने के बावजूद समय पर कार्रवाई करने में विफल रहा। इसमें वर्ष 2014 के स्पाइसजेट प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उस समय वित्तीय संकट के दौरान DGCA ने अग्रिम टिकट बुकिंग पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए थे, जबकि गो फर्स्ट मामले में ऐसा नहीं किया गया।
यशवंत शेनॉय ने यह भी दावा किया है कि यात्रियों के नुकसान का वास्तविक पैमाना एयरलाइन द्वारा बताए गए आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है। गो फर्स्ट ने अप्रैल 2023 में 4,118 उड़ानें रद्द होने और लगभग 77,500 यात्रियों के प्रभावित होने की बात कही थी, जबकि विभिन्न रिपोर्टों में यात्रियों के लगभग ₹900 करोड़ बकाया होने का अनुमान लगाया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि 10 मई तक टिकट बिक्री जारी रहने के कारण यात्रियों से वसूली गई कुल राशि लगभग ₹2,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने एयरलाइन के परिचालन बंद होने की जानकारी होने के बावजूद टिकट बेचकर यात्रियों को कथित रूप से आर्थिक नुकसान पहुंचाया और अनुचित लाभ प्राप्त किया। पुलिस अब बोर्ड के निर्णयों, नियामकीय पत्राचार, टिकट बुकिंग रिकॉर्ड, भुगतान लेनदेन तथा संबंधित घटनाक्रम की विस्तृत जांच करेगी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि यद्यपि यह मामला मुख्य रूप से कॉरपोरेट और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है, फिर भी अग्रिम भुगतान लेने वाले डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म की जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी सेवा प्रदाता की परिचालन क्षमता या वित्तीय स्थिति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाए तो उपभोक्ताओं को तत्काल सूचना देना, बुकिंग रोकना और नियामकीय मानकों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है। उनके अनुसार नियामक संस्थाओं, सेवा प्रदाताओं और वित्तीय संस्थानों के बीच रीयल-टाइम समन्वय तथा समय पर उपभोक्ता चेतावनी व्यवस्था बड़े पैमाने पर होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच और परीक्षण अभी होना बाकी है तथा इस चरण में किसी भी आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
