गाजियाबाद में मखाने के कारोबार की आड़ में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।

मखाने के कारोबार की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 17 युवतियों समेत 20 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित राजेंद्र नगर में मखाने के कारोबार की आड़ में संचालित एक कथित फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए 17 युवतियों समेत कुल 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, गिरोह पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था। मामले में मुख्य आरोपी अभिषेक जैन, उसकी पत्नी हिना, सुनील जैन, पीयूष जैन और सलीम सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह कथित तौर पर ‘जैनसन इंटरनेशनल’ नाम से पंजीकृत एक फर्म की आड़ में इस नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोप है कि आरोपी विभिन्न जॉब पोर्टल और रोजगार संबंधी वेबसाइटों से बेरोजगार युवाओं का डेटा प्राप्त करते थे और फिर कॉल सेंटर से उनसे संपर्क कर आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव देते थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कॉल सेंटर में कार्यरत कई युवतियां स्वयं को सॉफ्टवेयर इंजीनियर या भर्ती सलाहकार बताकर पीड़ितों से बातचीत करती थीं। आरोप है कि वे भारत के अलावा दुबई और सऊदी अरब में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उम्मीदवारों और उनके परिवारों से ₹50,000 से ₹1 लाख तक विभिन्न शुल्कों के नाम पर वसूलती थीं। रकम मिलने के बाद न तो नौकरी उपलब्ध कराई जाती थी और न ही धन वापस लौटाया जाता था।

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पुलिस के अनुसार, अब तक इस नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली (NCRP) पर 24 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि इस गिरोह द्वारा की गई कथित धोखाधड़ी की कुल राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जारी है।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 लैपटॉप, 23 स्मार्टफोन, 12 कीपैड मोबाइल फोन, 47 सिम कार्ड, 16 डेबिट कार्ड, 10 मुहरें, आठ चेकबुक, बड़ी संख्या में कथित फर्जी वोटर पहचान पत्र, दो प्रिंटर, 12 पावर एडेप्टर, सात पेन ड्राइव और एक कार बरामद की है। बरामद डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि नेटवर्क के दायरे और संभावित पीड़ितों की पहचान की जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि कॉल सेंटर में कार्यरत युवतियों को इस काम के लिए कथित तौर पर ₹15,000 से ₹30,000 प्रति माह वेतन दिया जाता था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उन्हें कथित धोखाधड़ी की प्रकृति की जानकारी थी या नहीं तथा प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या थी।

Future Crime Research Foundation के अनुसार, फर्जी जॉब ऑफर आज साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों का तेजी से बढ़ता माध्यम बन चुके हैं। अपराधी रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाते हुए प्रोसेसिंग फीस, वीजा, दस्तावेज सत्यापन या विदेश नियुक्ति के नाम पर धन ऐंठते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि नौकरी के नाम पर अग्रिम भुगतान मांगने वाली किसी भी संस्था की स्वतंत्र रूप से जांच करें और केवल आधिकारिक एवं सत्यापित भर्ती माध्यमों पर ही भरोसा करें।

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