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पूर्व MHA अधिकारी के दावे से क्रिकेट जगत में हलचल, शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ पर लगाए गंभीर आरोप

Team The420
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पूर्व गृह मंत्रालय (MHA) के अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि भारत दौरे पर आने वाली पाकिस्तान क्रिकेट टीम और उसके प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी में शामिल थे। उन्होंने शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए तथा पाकिस्तान के पूर्व कोच बॉब वूल्मर की 2007 में हुई मौत का भी जिक्र किया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के एक बयान ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़े पुराने विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान मणि ने दावा किया कि भारत दौरे पर आने वाली पाकिस्तान क्रिकेट टीम और उसके प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी में शामिल होते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी गतिविधि के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका हो सकती थी। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई नया आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।

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मणि ने बातचीत के दौरान पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लेते हुए दावा किया कि दोनों खिलाड़ियों ने कथित तौर पर तत्कालीन पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने भारत में ड्रग्स लाने की बात स्वीकार की थी। उनके अनुसार, इस घटना के बाद दोनों खिलाड़ियों को पाकिस्तान वापस भेज दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत इस्तेमाल तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके आकलन के अनुसार उस समय भारत आने वाले कुछ पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडलों के जरिए ड्रग्स की तस्करी भी की जाती थी।

पॉडकास्ट के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि उस समय शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने कथित तौर पर कहा था कि प्रतिबंधित पदार्थ उनके निजी उपयोग के लिए थे। इस पर मणि ने असहमति जताते हुए कहा कि उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत उपयोग का मामला नहीं था और इस पूरे घटनाक्रम को व्यापक सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2006 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से पहले कराए गए डोपिंग परीक्षण में शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ के प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड ‘नैंड्रोलोन’ के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद दोनों खिलाड़ियों को भारत दौरे से वापस बुला लिया था। बाद में दिसंबर 2006 में एक ट्रिब्यूनल ने दोनों खिलाड़ियों पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया था। उस समय सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में ड्रग्स तस्करी के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।

पूर्व अधिकारी ने पाकिस्तान के पूर्व मुख्य कोच बॉब वूल्मर की मार्च 2007 में हुई संदिग्ध मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वूल्मर कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी का विरोध कर रहे थे और संभव है कि उनकी मौत का संबंध इसी मुद्दे से रहा हो। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह उपलब्ध तथ्यों और उनके आकलन पर आधारित निष्कर्ष है।

गौरतलब है कि बॉब वूल्मर की मौत की जांच जमैका पुलिस सहित कई एजेंसियों ने की थी। शुरुआती दौर में हत्या की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद की जांच में अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए। आधिकारिक स्तर पर उनकी मौत को पाकिस्तान क्रिकेट टीम से जुड़ी किसी कथित ड्रग्स तस्करी गतिविधि से जोड़ने की पुष्टि कभी नहीं हुई।

मणि ने यह भी दावा किया कि गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान आतंकवाद की फंडिंग के स्रोतों पर नियमित चर्चा होती थी और उस समय यह माना जाता था कि ड्रग्स तस्करी से होने वाली कमाई का एक हिस्सा आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण में इस्तेमाल होता है। उनके अनुसार, उस समय उपलब्ध सुरक्षा आकलनों में अफगानिस्तान क्षेत्र में अफीम की पैदावार और सीमा पार आतंकवाद के बीच संभावित संबंधों पर भी विचार किया जाता था।

बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान कथित तौर पर प्रसिद्ध व्यक्तियों का इस्तेमाल क्यों करता था, तो उन्होंने कहा कि शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे खिलाड़ी चर्चित चेहरों में शामिल थे। उन्होंने पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटरों सलीम मलिक और शाहिद अफरीदी का भी उल्लेख किया, हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि उनके नाम किसी विशेष मामले में सामने नहीं आए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके आकलन के अनुसार पूरी टीम की भूमिका की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आरवीएस मणि के इन दावों पर अभी तक शोएब अख्तर, मोहम्मद आसिफ, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) या पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साथ ही, इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई नया आधिकारिक साक्ष्य या जांच निष्कर्ष भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में ये दावे फिलहाल पूर्व अधिकारी के व्यक्तिगत बयान के रूप में सामने आए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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