फरीदाबाद। हरियाणा सिविल सेवा (HCS) परीक्षा 2026 के दौरान एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फरीदाबाद के एक परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी अपने दोस्त की जगह ‘डमी कैंडिडेट’ बनकर परीक्षा देने पहुंचा, लेकिन बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान उसकी पूरी योजना ध्वस्त हो गई। पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना सेक्टर-7 स्थित एक परीक्षा केंद्र की है, जहां हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा चल रही थी। परीक्षा के दौरान जब उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जा रही थी, तब एक युवक के अंगूठे के निशान सिस्टम से मेल नहीं खा रहे थे। बार-बार प्रयास के बावजूद सत्यापन विफल रहने पर अधिकारियों को संदेह हुआ और मामले की गहन जांच शुरू की गई।
पूछताछ में युवक ने स्वीकार किया कि वह वास्तविक उम्मीदवार नहीं है, बल्कि अपने दोस्त की जगह परीक्षा देने आया है। जांच में सामने आया कि आरोपी युवक और असली उम्मीदवार दोनों दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में परीक्षा में फर्जी तरीके से सफलता पाने की साजिश रची गई।
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बताया जा रहा है कि असली उम्मीदवार ने अपने दोस्त को परीक्षा देने के लिए राजी किया था। हालांकि, शुरुआत में डमी कैंडिडेट बनने वाले युवक ने बायोमेट्रिक जांच को लेकर संकोच जताया था, लेकिन बार-बार कहने पर वह तैयार हो गया। योजना के तहत वह परीक्षा केंद्र के अंदर बैठकर पेपर हल कर रहा था, जबकि असली उम्मीदवार केंद्र के बाहर कार में बैठकर इंतजार कर रहा था।
मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि जैसे ही अंदर डमी कैंडिडेट के पकड़े जाने की भनक असली उम्मीदवार को लगी, वह मौके से फरार हो गया। हालांकि, पुलिस ने तकनीकी निगरानी और लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए उसे भी जल्द ही पकड़ लिया। दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि क्या इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है या यह केवल व्यक्तिगत स्तर पर रची गई साजिश थी। जांच में परीक्षा से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बायोमेट्रिक तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। पारंपरिक पहचान प्रणालियों के मुकाबले बायोमेट्रिक सत्यापन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है, जिससे इस तरह के मामलों का समय रहते खुलासा संभव हो पाता है।
इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा कि “डिजिटल और बायोमेट्रिक सिस्टम ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को काफी मजबूत किया है। हालांकि, अपराधी अब भी नए तरीके खोजने की कोशिश करते हैं, लेकिन तकनीकी सत्यापन उनके मंसूबों को विफल कर देता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता भी बेहद जरूरी है, ताकि युवा किसी भी गलत रास्ते की ओर न बढ़ें।”
अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अभ्यर्थियों को भी चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी अवैध तरीके से सफलता पाने की कोशिश न करें।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कुछ लोग गलत रास्ते अपनाने से नहीं हिचकते। हालांकि, तकनीकी निगरानी और सख्त व्यवस्था के चलते ऐसे प्रयास लगातार विफल हो रहे हैं।
आने वाले समय में जांच एजेंसियां इस केस से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। यह घटना न केवल एक आपराधिक साजिश का खुलासा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को बनाए रखने के लिए सतर्कता और तकनीक दोनों ही समान रूप से जरूरी हैं।
