बरहामपुर (ओडिशा): ओडिशा के बरहामपुर में पुलिस ने सेना के दो सेवानिवृत्त जवानों को फर्जी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी बनकर संपत्ति विवाद में पुलिस और परिजनों पर दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर जाली सरकारी दस्तावेज, नकली आधिकारिक मुहरें और फर्जी पहचान पत्र तैयार कर खुद को खुफिया एजेंसियों का अधिकारी बताने की कोशिश की।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पलासा के निकट ब्रह्मंतारिया निवासी 53 वर्षीय दुर्गा प्रसाद ब्रह्मा और ओडिशा के बरहामपुर के अंकुली स्थित निगम नगर निवासी 58 वर्षीय प्रदीप कुमार मंडल के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों एक-दूसरे को सेना में सेवा के दौरान से जानते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सेवा संबंधी पहचान पत्र, फर्जी RAW मूवमेंट ऑर्डर, नकली IB प्रतिनिधित्व पत्र, बिना पंजीकरण नंबर वाली दो मोटरसाइकिलें, जाली अवकाश प्रमाणपत्र तथा कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र की प्रति बरामद की है। जांच में इन दस्तावेजों पर नकली सरकारी मुहरों और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार प्रदीप कुमार मंडल का अपने पैतृक संपत्ति को लेकर परिवार के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। वर्ष 2011 में उसकी मां और चार भाई-बहनों ने कथित तौर पर उसकी सहमति के बिना संपत्ति बेच दी थी। इसके बाद उसने इस मामले में दीवानी न्यायालय का रुख किया। वर्ष 2025 में उसे अपनी मां का तहसीलदार द्वारा जारी कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र मिला, जिसमें उसके भाई-बहनों के नाम तो दर्ज थे, लेकिन उसका नाम शामिल नहीं था।
पुलिस के अनुसार इसी विवाद को अपने पक्ष में निपटाने और परिजनों पर दबाव बनाने के उद्देश्य से दोनों आरोपियों ने मिलकर साजिश रची। उन्होंने कथित तौर पर RAW और IB के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए, नकली आधिकारिक मुहरें बनाईं और फर्जी पहचान पत्र एवं अवकाश प्रमाणपत्र तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर वे स्वयं को दोनों खुफिया एजेंसियों का अधिकारी बताकर प्रभाव जमाने का प्रयास कर रहे थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को आरोपियों की गतिविधियों पर संदेह हुआ। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता की जांच की गई, जिसमें उनके फर्जी होने के पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले। इसके बाद बरहामपुर के बैद्यनाथपुर थाना पुलिस ने एक सहायक उपनिरीक्षक की लिखित शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए किन संसाधनों और तकनीकों का इस्तेमाल किया, क्या उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को भी इसी तरह धोखा देने का प्रयास किया था और इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और संभावित अन्य अपराधों का भी पता लगाया जा सके।
