DGGI अहमदाबाद की जांच में खुली परतें; शेल कंपनियों और फर्जी बिलिंग नेटवर्क का हुआ भंडाफोड़

₹63 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले का खुलासा: दिल्ली की कंपनी पर बड़ी कार्रवाई, डायरेक्टर गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: देश में फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े मामलों पर चल रही सख्त कार्रवाई के बीच डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) अहमदाबाद ने एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच एजेंसी ने करीब ₹63 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले का खुलासा करते हुए दिल्ली स्थित एक कंपनी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी कंपनी बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी कर रही थी। इन फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत दावा किया जा रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क केवल कागजों पर मौजूद कई शेल कंपनियों के जरिए संचालित किया जा रहा था। इन कंपनियों का कोई वास्तविक व्यापारिक संचालन नहीं था, लेकिन इन्हें GST पंजीकरण के जरिए सक्रिय दिखाया गया था। इन्हीं फर्जी फर्मों के माध्यम से लगातार फर्जी बिल तैयार कर टैक्स चोरी की जा रही थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई शेल कंपनियों का उपयोग कर एक जटिल नेटवर्क तैयार किया था, जिसके जरिए फर्जी इनवॉइस एक कंपनी से दूसरी कंपनी तक पास किए जाते थे। इस प्रक्रिया से अंतिम लाभार्थी कंपनियां बिना किसी वास्तविक लेन-देन के टैक्स क्रेडिट का लाभ ले रही थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन फर्जी कंपनियों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन में भी संदिग्ध गतिविधियां पाई गई हैं। जांच एजेंसियां अब इन खातों और डिजिटल रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

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अधिकारियों ने बताया कि यह मामला उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसमें देशभर में फर्जी बिलिंग और GST धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल के महीनों में DGGI ने कई ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जिनमें करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी शामिल रही है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस तरह के घोटाले में अपराधी फर्जी कंपनियां बनाकर नकली इनवॉइस तैयार करते हैं। इन बिलों को आगे अन्य व्यवसायों को पास किया जाता है, जो इन्हें वास्तविक व्यापार दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कोई वास्तविक माल या सेवा का लेन-देन नहीं होता।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटाले न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ईमानदार करदाताओं पर भी अतिरिक्त बोझ डालते हैं। फर्जी ITC नेटवर्क के कारण बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है और टैक्स सिस्टम की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

जांच अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं, क्योंकि प्रारंभिक जांच में कई अन्य संदिग्ध कंपनियों और व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाला जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने लाई जा सके।

फिलहाल गिरफ्तार डायरेक्टर से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह घोटाला कितने समय से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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