एटा। कृषि मंत्रालय में नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक युवक के परिवार से ₹5 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि नौकरी नहीं लगने पर जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो उसके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। पीड़ित का यह भी आरोप है कि विवाद के दौरान एक युवक ने लाइसेंसी राइफल उसकी ओर तानकर उसे डराने की कोशिश की। मामले में दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।
मामला जैथरा थाना क्षेत्र के नगला कमले गांव का है। गांव निवासी प्रेमकिशोर ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को दी शिकायत में आरोप लगाया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले नगला बहादुर गांव के तीन लोग उसके घर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली स्थित कृषि मंत्रालय में उनके रिश्तेदार ऊंचे पद पर तैनात हैं और उनकी पहुंच के जरिए प्रेमकिशोर के बेटे की सरकारी नौकरी लगवाई जा सकती है।
आरोपियों ने कथित तौर पर दो महीने के भीतर नौकरी लगवाने का भरोसा देते हुए इसके बदले ₹10 लाख की मांग की। पीड़ित के अनुसार, उसने आरोपियों की बात पर भरोसा करते हुए ₹5 लाख दे दिए। शेष रकम नौकरी लगने के बाद देने की बात बताई गई थी।
शिकायत के मुताबिक, निर्धारित समय बीतने के बाद भी बेटे की नौकरी नहीं लगी। जब प्रेमकिशोर ने आरोपियों से इस संबंध में जानकारी मांगी तो वे कथित तौर पर अलग-अलग बहाने बनाकर मामले को टालते रहे। काफी समय गुजरने के बाद भी नौकरी नहीं लगने पर पीड़ित ने अपने दिए हुए ₹5 लाख वापस मांगने शुरू किए।
पीड़ित का आरोप है कि 23 अगस्त को वह अपने बेटे राजीव के साथ आरोपियों के घर पहुंचा और रकम लौटाने की मांग की। इस दौरान कथित तौर पर आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर उसे जान से मारने की धमकी दी गई।
शिकायत में प्रेमकिशोर ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों में शामिल एक युवक ने लाइसेंसी राइफल निकालकर उसकी ओर तान दी। इससे वह और उसका बेटा भयभीत हो गए। इसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से की। कार्रवाई नहीं होने या अपेक्षित कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नौकरी दिलाने के नाम पर वास्तव में कितने लोगों से संपर्क किया गया था और क्या इस तरह सरकारी नौकरी का झांसा देकर अन्य लोगों से भी रकम ली गई है।
जांच का एक प्रमुख बिंदु ₹5 लाख के कथित लेनदेन की पुष्टि करना भी होगा। पुलिस शिकायत में बताए गए भुगतान के तरीके, उपलब्ध दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। यदि रकम बैंक खाते के जरिए दी गई है तो संबंधित बैंक रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं नकद भुगतान का दावा होने पर पुलिस उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की जानकारी जुटा सकती है।
पुलिस यह भी जांच करेगी कि कृषि मंत्रालय में किसी रिश्तेदार या अधिकारी से संबंध होने का आरोप सही था या केवल पीड़ित को भरोसे में लेने के लिए ऐसा दावा किया गया था। नौकरी लगवाने के नाम पर सरकारी विभाग और अधिकारियों की कथित पहचान का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।
राइफल से धमकाने के आरोप को लेकर भी पुलिस संबंधित तथ्यों की पड़ताल करेगी। हथियार लाइसेंसी है या नहीं, घटना के समय उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या धमकी देने के आरोप की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से होती है, इन बिंदुओं की जांच की जा सकती है।
नौकरी के नाम पर ठगी के मामलों में अक्सर सरकारी विभागों में कथित पहुंच, बड़े अधिकारियों से संबंध और जल्द नियुक्ति कराने का भरोसा देकर पीड़ितों से रकम ली जाती है। ऐसे मामलों में नौकरी का नियुक्ति पत्र, विभागीय पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज दिखाकर भी भरोसा कायम करने की कोशिश की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों के सामने अब कथित ठगी की रकम, नौकरी दिलाने के दावे और धमकी से जुड़े आरोपों की पुष्टि करने की चुनौती है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
