नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने कथित ₹132 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में रमनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, हरियाणा और दिल्ली में नौ ठिकानों पर तलाशी ली। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई इस कार्रवाई में गया में छह, गुरुग्राम में दो और नई दिल्ली में एक स्थान शामिल है। जांच एजेंसी को ऋण की रकम के कथित दुरुपयोग और संपत्तियों को कार्रवाई से बचाने के लिए इधर-उधर किए जाने के संकेत मिले हैं।
जांच के अनुसार, गया स्थित रमनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत तथा नितेश के पास बताया गया है। कंपनी को बैंकों के एक समूह ने करीब ₹85 करोड़ का ऋण दिया था। इस समूह का नेतृत्व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था। आरोप है कि ऋण से प्राप्त करीब ₹58 करोड़ की रकम को निर्धारित परियोजना के बजाय अन्य गतिविधियों में कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
जांच में ऋण हासिल करने के तरीके पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि कंपनी ने परियोजना पूरी होने से संबंधित फर्जी या कथित रूप से जाली रिपोर्ट के आधार पर बैंक से ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं। इन रिपोर्टों को कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट से उपलब्ध कराए जाने का आरोप है। ऋण की गारंटी के लिए अखौरी गोपाल और उनके परिवार के सदस्यों की व्यक्तिगत गारंटी भी दी गई थी।
जांच एजेंसी के सामने संपत्तियों से जुड़े लेनदेन भी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आए हैं। जांच में पांच ऐसी संपत्तियों की पहचान हुई है, जिन्हें संबंधित समूह की एक इकाई के बकाये के बदले टाटा मोटर्स के पास गिरवी या बंधक रखा गया था। आरोप है कि इन संपत्तियों को गिरवी होने के बावजूद हाल में बेच दिया गया।
इन संपत्तियों की बिक्री को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठे हैं। जांच के मुताबिक, संपत्तियों को उनके वास्तविक मूल्य की तुलना में बहुत कम कीमत पर बेचे जाने का संदेह है। बिक्री विलेखों में भुगतान की रकम को नकद प्राप्ति के रूप में दर्शाए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी को आशंका है कि संपत्तियों के कुछ खरीदार वास्तविक लाभार्थी नहीं, बल्कि अखौरी गोपाल के कथित बेनामी या प्रतिनिधि हो सकते हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ खरीदार आर्थिक रूप से कमजोर या सीमित साधनों वाले लोग बताए गए हैं। एजेंसी को संदेह है कि ऐसे लोगों के पास संपत्तियों की खरीद में दर्शाई गई रकम की व्यवस्था करने की वास्तविक वित्तीय क्षमता नहीं थी। इसी वजह से उनके माध्यम से संपत्तियों को दूसरे नामों पर स्थानांतरित किए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी को संदेह है कि संपत्तियों की बिक्री का उद्देश्य उन्हें संभावित कुर्की और अन्य कानूनी कार्रवाई से दूर करना था। यदि जांच में यह साबित होता है कि गिरवी या बंधक संपत्तियों को जानबूझकर कम कीमत पर ऐसे लोगों के नाम किया गया, जिनका वास्तविक स्वामित्व से संबंध नहीं था, तो यह कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन के साथ-साथ संपत्ति हस्तांतरण की एक अलग महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।
मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर से दाखिल आरोपपत्र के आधार पर अपराध से अर्जित संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब ₹131.79 करोड़ बताई गई है। यह रकम बैंक ऋण खाते के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में बदलने से जुड़े मूल्य के अनुरूप मानी गई है।
ताजा तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने कथित बैंक धोखाधड़ी, ऋण की रकम के इस्तेमाल और संपत्तियों के संदिग्ध हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। नौ स्थानों पर हुई कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि ऋण की रकम कहां और किस तरीके से स्थानांतरित की गई तथा संपत्तियों की बिक्री के पीछे वास्तविक लाभार्थी कौन थे। मामले में आगे की जांच के आधार पर संदिग्ध लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को लेकर कार्रवाई बढ़ सकती है।
