14 राज्यों के टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से कथित वसूली में गड़बड़ी की जांच तेज; दूसरे चरण में अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की संभावना, आठ बैंक लॉकर भी खुलेंगे

टोल टैक्स घोटाले की जांच में अब एनएचएआई अधिकारी भी ईडी के निशाने पर

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By Roopa
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लखनऊ। 14 राज्यों के टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिये टोल वसूली में कथित हेराफेरी की जांच अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचती दिख रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच के दूसरे चरण में उन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर सकता है, जिनकी भूमिका टोल वसूली में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ी पाई जाएगी।

जांच एजेंसी फिलहाल टोल प्लाजा संचालकों और कर्मचारियों के कथित संबंधों की पड़ताल कर रही है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि अनधिकृत सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोल राजस्व में कथित हेराफेरी किस तरह की गई और इस प्रक्रिया में कौन लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल थे। जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों के आधार पर संभावित लाभार्थियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच के अगले चरण में एनएचएआई के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की जा सकती है। एजेंसी यह समझने का प्रयास करेगी कि विभिन्न टोल प्लाजा पर इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और टोल संग्रह प्रणाली की निगरानी किस स्तर पर होती थी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि कथित अनियमितताओं के बावजूद निगरानी तंत्र में कोई चूक हुई या संबंधित स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि अभी तक किसी एनएचएआई अधिकारी या कर्मचारी को मामले में आरोपी बनाए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ईडी ने मामले में पहले की कार्रवाई के दौरान आठ बैंक लॉकर भी फ्रीज कराए थे। अब इन लॉकरों को खुलवाकर उनकी तलाशी लेने की तैयारी की जा रही है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इनमें टोल वसूली में कथित धांधली से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड या अन्य सामग्री मिल सकती है। लॉकरों से बरामद सामग्री जांच को आगे बढ़ाने के साथ कथित नेटवर्क के वित्तीय और प्रशासनिक संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में मदद कर सकती है।

जांच का एक प्रमुख केंद्र कई संदिग्ध बैंक खातों में हुए लेनदेन भी हैं। ईडी खातों में जमा और निकासी का विस्तृत ब्योरा जुटाकर रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर करोड़ों रुपये की रकम किन खातों में भेजी गई, किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंची और बाद में उसे किन माध्यमों से स्थानांतरित या निवेश किया गया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

वित्तीय पड़ताल के जरिये ईडी कथित अवैध कमाई के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। बैंक खातों के अलावा संदिग्ध लेनदेन से जुड़े अन्य वित्तीय माध्यमों की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि कथित अपराध से हासिल रकम को छिपाने या उसे वैध आय अथवा कारोबारी लेनदेन के रूप में पेश करने के लिए कई स्तरों पर धन हस्तांतरण किया गया था या नहीं।

जांच एजेंसी आरोपितों से जुड़े संभावित चल-अचल संपत्ति निवेश का ब्योरा भी जुटा रही है। इसके लिए बरामद दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित टोल घोटाले से अर्जित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया। संपत्तियों की पहचान होने पर उनके लिए इस्तेमाल धन के स्रोत का बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से मिलान किया जा सकता है।

टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टोल संग्रह सीधे सार्वजनिक राजस्व और राजमार्ग ढांचे से जुड़ा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि सॉफ्टवेयर के जरिये वसूली के आंकड़ों में जानबूझकर हेरफेर किया गया या टोल राजस्व को गलत तरीके से दूसरी जगह भेजा गया, तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी अलग-अलग चरणों में जुटाए गए वित्तीय तथा दस्तावेजी साक्ष्यों को आपस में जोड़ रही है। आठ बैंक लॉकरों की तलाशी, संदिग्ध बैंक खातों की जांच और टोल प्लाजा से जुड़े लोगों से संभावित पूछताछ के बाद कथित नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

एनएचएआई के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। एजेंसी परिचालन रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और निगरानी व्यवस्था की जांच के बाद ही यह तय करेगी कि कथित अनियमितताओं में किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही रही है या नहीं।

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