सुप्रीम कोर्ट ने Reliance Communications से जुड़े fraud classification मामले में अनिल अंबानी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

अनिल अंबानी समूह पर शिकंजा कसा: ₹581 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने की अटैच, मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज

Team The420
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹581 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में की गई है।

ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जारी एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के माध्यम से की गई है। जांच एजेंसी ने 11 मार्च को आदेश जारी कर देश के कई राज्यों में स्थित जमीन के टुकड़ों को अटैच किया है।

जांच के दायरे में आई संपत्तियां गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में स्थित बताई गई हैं। ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग ₹581.65 करोड़ है।

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एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के खिलाफ चल रही वित्तीय जांच का हिस्सा है। जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन जुटाया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, जुटाए गए धन का एक बड़ा हिस्सा बाद में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) में बदल गया। आरोप है कि इन कंपनियों ने करीब ₹11,000 करोड़ से अधिक की राशि विभिन्न बैंकिंग स्रोतों से प्राप्त की थी, जो बाद में वित्तीय संकट में फंस गई।

ईडी का कहना है कि जांच के दौरान यह भी पाया गया कि रिलायंस समूह की कुछ कंपनियों से जुटाए गए धन को अन्य संबंधित कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि यह पैसा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी कंपनियों तक पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, धन के इस ट्रांसफर के लिए बड़ी संख्या में शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों का वास्तविक व्यवसायिक संचालन लगभग नगण्य था और इनकी वित्तीय क्षमता भी बेहद सीमित बताई गई है।

ईडी का आरोप है कि इन शेल संस्थाओं के जरिए फंड को कई चरणों में घुमाया गया, जिससे धन के वास्तविक उपयोग और स्रोत को छिपाया जा सके। जांच में यह भी कहा गया है कि इन कंपनियों के संचालन में शामिल प्रमुख व्यक्तियों और प्रमोटरों की ओर से दुर्भावनापूर्ण इरादे (माला फाइड इंटेंट) के संकेत मिले हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक, हाल ही में 6 मार्च को की गई तलाशी कार्रवाई के बाद इस मामले में नई जानकारियां सामने आई थीं। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर ही नई संपत्तियों को अटैच करने का फैसला लिया गया।

ईडी ने इससे पहले भी अनिल अंबानी समूह की संपत्तियों को अटैच किया था। ताजा कार्रवाई के बाद अब तक इस मामले में कुल अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य लगभग ₹16,310 करोड़ तक पहुंच गया है।

यह पूरा मामला उन शिकायतों से जुड़ा है जो यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की ओर से दर्ज कराई गई थीं। इन शिकायतों के आधार पर पहले केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच ईडी ने शुरू की।

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब इस पूरे वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सार्वजनिक धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और उसमें किस स्तर तक अनियमितताएं हुईं।

वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की जांच से बड़े कॉर्पोरेट वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। आने वाले समय में इस मामले में और भी वित्तीय लेनदेन और संबंधित संस्थाओं की जांच होने की संभावना जताई जा रही है।

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