नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत ओडिशा स्थित एआरएसएस समूह से जुड़े परिसरों पर शुक्रवार को तलाशी अभियान शुरू किया। कार्रवाई समूह के प्रवर्तकों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के अलावा पूर्व प्रवर्तक एवं निदेशक परिवार के सदस्यों तथा एएमआर-एएमआरएल समूह से जुड़े परिसरों पर भी की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई एसआरईआई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड और एसआरईआई इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड से कथित तौर पर लिए गए संदिग्ध और अनियमित ऋण से जुड़े मामले में की जा रही है।
जांच के दायरे में एआरएसएस समूह से जुड़े अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और सुभाष अग्रवाल के परिवार तथा उनसे संबंधित संस्थाओं के परिसरों को शामिल किया गया है। इसके अलावा एएमआर-एएमआरएल समूह और उसके प्रवर्तक महेश कुमार रेड्डी अल्थुरु से जुड़े परिसरों पर भी कार्रवाई की जा रही है।
ईडी के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र एसआरईआई की दोनों वित्तीय कंपनियों से कथित रूप से लिए गए ऋण और बाद में उनके भुगतान में हुई अनियमितताएं हैं। एजेंसी को आशंका है कि कुछ ऋणों का वास्तविक उद्देश्य अलग हो सकता है और धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया हो सकता है।
जांच में कथित धन के डायवर्जन और एक स्थान से दूसरे स्थान पर धन को घुमाकर वित्तीय लेनदेन को सही या वैध दिखाने की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा ऋण की अदायगी के बजाय पुराने ऋण या देनदारियों को नए वित्तीय स्रोतों से संभालने की कथित व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।
तलाशी अभियान एक साथ कई शहरों में चलाया जा रहा है। जांच एजेंसी की टीमें कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में समूह से जुड़े परिसरों और संबंधित संस्थाओं के ठिकानों पर पहुंची हैं। तलाशी के दौरान वित्तीय दस्तावेज, ऋण से जुड़े रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल सामग्री की जांच किए जाने की संभावना है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ऋण के रूप में प्राप्त धन की वास्तविक आवाजाही क्या थी और रकम किन कंपनियों, संस्थाओं या खातों के माध्यम से आगे भेजी गई। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित कंपनियों के बीच किसी प्रकार के आपसी लेनदेन के जरिए धन का वास्तविक स्रोत और उपयोग छिपाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
मामले में कथित ‘एवरग्रीनिंग’ की आशंका भी जांच का हिस्सा है। वित्तीय क्षेत्र में एवरग्रीनिंग से आशय ऐसी व्यवस्था से है जिसमें पुराने या दबाव में आए ऋण को नए ऋण या अन्य वित्तीय लेनदेन के जरिए इस तरह संभाला जाता है कि खाते में वास्तविक वित्तीय स्थिति तुरंत स्पष्ट न हो। एजेंसी यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही है कि संबंधित ऋण खातों में ऐसी कोई व्यवस्था अपनाई गई थी या नहीं।
ईडी की कार्रवाई अभी तलाशी और जांच के चरण में है। फिलहाल एजेंसी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री बरामद हुई है और मामले में किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है या नहीं।
जांच के दौरान बैंक खातों, ऋण दस्तावेजों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की विस्तृत पड़ताल से कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक प्रकृति सामने आने की उम्मीद है। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि ऋण की रकम का कितना हिस्सा निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हुआ और कितना धन कथित तौर पर दूसरी गतिविधियों में भेजा गया।
फिलहाल सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। तलाशी अभियान से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
