धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में मृतक आश्रित नियुक्ति से जुड़ा करीब चार दशक पुराना विवाद एक बार फिर सामने आया है। धनबाद में एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसके पड़ोसी ने कथित तौर पर उसकी पहचान और नाम का इस्तेमाल कर BCCL में नौकरी हासिल कर ली और करीब 40 वर्षों तक उसी नाम पर काम करता रहा। अब मामला भविष्य निधि (PF) की रकम तक पहुंच गया है। पीड़ित दंपती का आरोप है कि जिस नौकरी पर उनका अधिकार था, उसका लाभ किसी दूसरे व्यक्ति ने उठाया और अब वह परिवार भविष्य निधि की राशि पर भी दावा कर रहा है।
अपने अधिकार और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर रामू तुरी और उनकी पत्नी मीना देवी बुधवार को रणधीर वर्मा चौक पर धरने पर बैठ गए। दंपती का कहना है कि वे लंबे समय से BCCL प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है।
1993 में पिता की मौत के बाद सामने आया विवाद
रामू तुरी के अनुसार, उनके पिता की वर्ष 1993 में खदान में डूबने की घटना में मौत हो गई थी। परिवार का कहना है कि कर्मचारी की मौत के बाद नियमों के तहत रामू तुरी को मृतक आश्रित के रूप में BCCL में नौकरी मिलनी थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले रामू साव ने कथित तौर पर रामू तुरी का नाम और पहचान इस्तेमाल कर नौकरी हासिल कर ली।
रामू तुरी का दावा है कि नौकरी हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद रामू साव ने कथित तौर पर करीब चार दशक तक BCCL में उसी पहचान के आधार पर काम किया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के जरिए होना बाकी है।
शिकायतों के बाद भी नहीं मिला समाधान
पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने इस मामले को BCCL के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर कोयला भवन और धनबाद के उपायुक्त कार्यालय तक उठाया। कई वर्षों से शिकायतें देने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली।
रामू तुरी के मुताबिक, एक समय इस कथित फर्जी नियुक्ति को लेकर रामू साव के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी और मामला दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि इसके बावजूद मूल विवाद का स्थायी समाधान नहीं हुआ और अब भविष्य निधि की रकम को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है।
PF की रकम पर भी दावा
मामले में अब सबसे अहम सवाल उस कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड और PF खाते को लेकर है, जिस नाम पर इतने वर्षों तक नौकरी की गई। रामू तुरी और मीना देवी का कहना है कि यदि उनकी पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की गई थी, तो सेवा अवधि के दौरान जमा हुई PF समेत अन्य लाभों पर वास्तविक हकदार की पहचान भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
दंपती ने मांग की है कि BCCL के नियुक्ति रिकॉर्ड, कर्मचारी की पहचान से जुड़े दस्तावेज, सेवा पुस्तिका, वेतन रिकॉर्ड और PF संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि नियुक्ति के समय किस व्यक्ति के दस्तावेज लगाए गए थे और वर्षों तक सेवा किस पहचान के आधार पर दर्ज रही।
दस्तावेजों की जांच से खुलेगा पूरा मामला
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण जांच वर्ष 1993 में हुई नियुक्ति की प्रक्रिया और उसके दौरान जमा किए गए दस्तावेजों की होगी। यदि रिकॉर्ड में नाम, पहचान, पारिवारिक विवरण या अन्य दस्तावेजों में विसंगति मिलती है तो उससे पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
रामू तुरी और मीना देवी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और यदि उनका दावा सही पाया जाता है तो उन्हें उनके वैधानिक अधिकार दिलाए जाएं। फिलहाल, रामू साव पर लगाए गए पहचान के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने के आरोप जांच का विषय हैं।
