दिल्ली के डाबड़ी इलाके में निजी बैंक की असिस्टेंट मैनेजर और उनकी बहन से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹50 लाख की ठगी का आरोप है। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

नौकरी का झांसा, भरोसे का सौदा: असिस्टेंट मैनेजर से ₹50 लाख की ठगी, कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज

Team The420
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नई दिल्ली:  राजधानी के डाबड़ी इलाके से भरोसे को झकझोर देने वाला एक बड़ा फ्रॉड सामने आया है, जहां एक निजी बैंक की असिस्टेंट मैनेजर को नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹50 लाख की ठगी का शिकार बना दिया गया। लंबे समय तक कार्रवाई न होने पर पीड़िता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर अब मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

बैंक में पहचान से शुरू हुआ भरोसे का खेल

पीड़िता रितु (परिवर्तित नाम) डाबड़ी इलाके में अपने परिवार के साथ रहती हैं और एक निजी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2020 में उनकी पहचान उसी बैंक के होम लोन विभाग में कार्यरत अंकित कटियार से हुई थी। शुरुआती बातचीत में आरोपी ने खुद को प्रभावशाली संपर्कों वाला व्यक्ति बताते हुए सरकारी नौकरी और बड़ी कंपनियों में ऊंचे पद दिलाने का भरोसा दिलाया।

रितु के मुताबिक, शुरुआत में आरोपी ने उन्हें ट्रेनिंग और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ₹35 हजार देने के लिए कहा। भरोसे में आकर उन्होंने यह रकम दे दी। इसके बाद आरोपी ने अलग-अलग बहानों से पैसे मांगने का सिलसिला शुरू कर दिया। कभी फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कराने, तो कभी एचआर पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर लगातार रकम की मांग की जाती रही।

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फर्जी HR नेटवर्क से बनाया गया दबाव

जांच में सामने आया कि आरोपी ने एक संगठित तरीके से इस ठगी को अंजाम दिया। कुछ अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल थे, जिन्होंने खुद को अलग-अलग कंपनियों के एचआर मैनेजर बताकर व्हाट्सऐप के जरिए पीड़िता से संपर्क किया। इन लोगों ने जॉब प्रोसेस को आगे बढ़ाने, इंटरव्यू क्लियर कराने और ऑफर लेटर जारी कराने जैसे बहानों से पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। पीड़िता ने इन झांसे में आकर अलग-अलग बैंक खातों में करीब ₹25 लाख ट्रांसफर कर दिए।

मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब आरोपी ने पीड़िता की छोटी बहन को भी अपने जाल में फंसा लिया। उसने उत्तर प्रदेश के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके एवज में ₹20 लाख नकद ले लिए। इस तरह आरोपी ने धीरे-धीरे दोनों बहनों से मिलाकर करीब ₹50 लाख की ठगी कर ली।

रकम वापस मांगने पर संपर्क तोड़ा

पीड़िता के अनुसार, जब लंबे समय तक कोई नौकरी नहीं मिली और हर बार नई मांगें सामने आने लगीं, तब उन्हें शक हुआ। उन्होंने आरोपी से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। कुछ समय बाद उसने फोन उठाना बंद कर दिया और पूरी तरह संपर्क से बाहर हो गया। इसके बाद पीड़िता ने डाबड़ी थाने में शिकायत दी, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आखिरकार पीड़िता ने अदालत का रुख किया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। अब धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जांच में आरोपी के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

पढ़े-लिखे पेशेवर भी बन रहे निशाना

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े किस तरह पढ़े-लिखे और पेशेवर लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। खासतौर पर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बनाए जा रहे फर्जी एचआर नेटवर्क लोगों का भरोसा जीतकर बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नौकरी के लिए यदि बार-बार पैसे मांगे जाएं, खासकर निजी खातों में ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाया जाए, तो सतर्क हो जाना चाहिए। आधिकारिक भर्ती प्रक्रियाओं में इस तरह की आर्थिक मांगें आमतौर पर नहीं होतीं।

फिलहाल, पीड़िता को उम्मीद है कि जांच के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई जाएगी और उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकेगी। वहीं, यह मामला अन्य लोगों के लिए भी चेतावनी बनकर सामने आया है कि नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों की सच्चाई जांचे बिना किसी भी तरह का आर्थिक लेनदेन करना भारी पड़ सकता है।

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