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दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: साइबर फ्रॉड का ग्लोबल मॉड्यूल ध्वस्त, विदेशी कनेक्शन की जांच तेज

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By Roopa
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नई दिल्ली: ट्रांसनेशनल साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता में दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क कई देशों में फैले साइबर अपराधियों के साथ मिलकर काम कर रहा था और इसके कंबोडिया सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े होने की आशंका जताई गई है।

इस मामले में पूर्वी दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान वैभव राज (29) और अनिल कुमार (28) के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहे थे, जिसमें फर्जी पहचान, धमकी और डिजिटल धोखाधड़ी शामिल थी।

फर्जी अधिकारी बनकर चलता था “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी खुद को पुलिस, सीबीआई और कस्टम विभाग के अधिकारी बताकर पीड़ितों को कॉल करते थे। उन्हें बताया जाता था कि वे गंभीर आपराधिक या वित्तीय मामलों में फंस चुके हैं और तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

डर और दबाव के माहौल में पीड़ितों को “आरबीआई द्वारा सत्यापित खातों” में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया को ही “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” कहा जाता है, जो हाल के समय में तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन चुका है।

SIM बॉक्स तकनीक से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संचालन

यह पूरा मामला ऑपरेशन CyHawk 4.0 के दौरान सामने आया, जो 6–7 अप्रैल को चलाया गया था। जांच के दौरान पूर्वी दिल्ली के Mayur Vihar Phase-III स्थित GD कॉलोनी में एक अवैध SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ।

यह सिस्टम विदेशी VoIP कॉल्स को भारतीय मोबाइल नेटवर्क में बदल देता था, जिससे कॉल लोकल नंबर से आती हुई प्रतीत होती थी। इस तकनीक के कारण विदेशी साइबर अपराधियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता था।

अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा था, जो अलग-अलग देशों में बैठकर समन्वय के साथ काम कर रहा था।

तकनीकी और वित्तीय भूमिका में बंटा हुआ नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक, वैभव राज इस पूरे नेटवर्क के तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी संभालता था, जिसमें SIM बॉक्स सिस्टम, इंटरनेट कनेक्शन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल था।

वहीं अनिल कुमार पर आरोप है कि वह लॉजिस्टिक्स, SIM कार्ड की सप्लाई और म्यूल बैंक खातों के जरिए पैसों के लेन-देन का प्रबंधन करता था। दोनों की भूमिका इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखने में अहम थी।

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बड़ी बरामदगी: 350 से ज्यादा SIM कार्ड और उपकरण जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में साइबर अपराध से जुड़े उपकरण बरामद किए, जिनमें शामिल हैं—

  • 32 स्लॉट वाला सक्रिय SIM बॉक्स सिस्टम
  • 350 से अधिक SIM कार्ड
  • कई मोबाइल फोन और एक लैपटॉप
  • इंटरनेट राउटर और नेटवर्किंग उपकरण
  • बैंक दस्तावेज और कूरियर पैकेट

अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में उपकरणों की बरामदगी यह दर्शाती है कि यह एक बेहद संगठित और पेशेवर स्तर पर चलाया जा रहा साइबर क्राइम मॉड्यूल था।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच में तेजी

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी मुंबई स्थित हैंडलर्स के संपर्क में थे और इनके तार कंबोडिया आधारित साइबर सिंडिकेट से भी जुड़े हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क के फाइनेंशियल ट्रेल और डिजिटल कम्युनिकेशन की गहराई से जांच कर रही हैं। कम से कम तीन बैंक खातों का संबंध पहले से दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों से भी सामने आया है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर बढ़ती चिंता

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक ऐसा अपराध बन चुका है जिसमें तकनीक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल किया जाता है। पीड़ितों को डर, भ्रम और तत्काल कार्रवाई के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ की चेतावनी

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने पहले भी ऐसे मामलों पर चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी अब अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुके हैं।

उन्होंने कहा है कि ऐसे नेटवर्क SIM बॉक्स, रिमोट एक्सेस टूल्स और अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट सिस्टम का इस्तेमाल करके कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने की कोशिश करते हैं। उनके अनुसार, इस तरह के मामलों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी जागरूकता बेहद जरूरी है।

पुलिस की सख्त चेतावनी और आगे की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीर और संगठित साइबर अपराध बताते हुए अपनी जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें जो गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी दे।

पुलिस ने कहा है कि जांच जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट को पूरी तरह खत्म करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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