अलवर/दिल्ली। दिल्ली के उत्तम नगर में चल रहे कथित ऑनलाइन ठगी के कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए डीग पुलिस ने 33 महिलाओं समेत 64 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से दो नाबालिगों को भी हिरासत में लिया। कार्रवाई के दौरान 88 मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड और बड़ी संख्या में ग्राहकों का बैंकिंग तथा व्यक्तिगत डेटा बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी निजी बैंकों के अधिकारी बनकर लोगों से संपर्क करते थे और क्रेडिट कार्ड तथा अन्य वित्तीय सेवाओं के नाम पर संवेदनशील जानकारी हासिल करते थे।
पुलिस के मुताबिक, उत्तम नगर स्थित आनंद एंटरप्राइजेज नाम से संचालित यह कथित कॉल सेंटर तीन मंजिला इमारत में चल रहा था। शनिवार देर रात दिल्ली पुलिस की सहायता से छापेमारी की गई। शुरुआती जांच में 83 कर्मचारी और प्रशिक्षण से जुड़े लोग पूछताछ के दायरे में आए, जिनमें 43 महिलाएं शामिल थीं। जांच में कथित ठगी से संबंध नहीं मिलने पर 19 लोगों को बाद में छोड़ दिया गया।
फर्जी बैंक दस्तावेज से खुला मामला
मामले की शुरुआत 20 अगस्त को डीग स्थित Axis Bank शाखा के प्रबंधक Phool Singh की शिकायत से हुई। बैंक के सामने फर्जी पहचान पत्र और विजिटिंग कार्ड आने के बाद इसकी जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस की पहुंच उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी Akash Rathaur तक हुई। उस पर आरोप है कि उसने WhatsApp के जरिए एक ग्राहक को Axis Bank के फर्जी दस्तावेज भेजे थे।
ग्राहक ने दस्तावेज बैंक कर्मचारी को दिखाए, जिसके बाद बैंक की सतर्कता टीम ने उनकी जांच की और उन्हें जाली पाया। Rathaur की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क की कड़ियां दिल्ली तक पहुंचने का दावा किया।
बैंक अधिकारी बनकर हासिल करते थे संवेदनशील जानकारी
पुलिस का आरोप है कि कथित गिरोह की संचालक Saloni Mittal, 47, के नेतृत्व में आरोपी खुद को Axis Bank और HDFC Bank के अधिकारी बताते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों से OTP, CVV, PAN विवरण और अन्य KYC जानकारी हासिल करते थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस डेटा का इस्तेमाल दूर से वित्तीय साधन खुलवाने और संगठित तरीके से धोखाधड़ी करने में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और नाबालिगों को WorkIndia समेत अन्य रोजगार पोर्टलों के माध्यम से भर्ती किया। उन्हें एक कथित कंपनी में नौकरी का भरोसा दिया जाता था। कॉल सेंटर में कर्मचारियों को प्रशिक्षक, साक्षात्कारकर्ता, टीम समन्वयक और कॉल करने वाले जैसे अलग-अलग काम सौंपे जाते थे।
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मासिक वेतन के अलावा ठगी पर कमीशन
जांच में सामने आया कि कर्मचारियों को कथित तौर पर ₹11,000 से ₹15,000 तक मासिक भुगतान किया जाता था। इसके अलावा ठगी के जरिए हासिल की गई रकम के आधार पर कमीशन दिए जाने का भी आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस व्यवस्था में कितने लोग सक्रिय रूप से शामिल थे और कथित ठगी से कितनी रकम जुटाई गई।
छापेमारी में Axis Bank, Yes Bank और HDFC Bank के अधिकारियों के नाम से बनाए गए फर्जी पहचान पत्र भी मिले। इसके अलावा बड़ी मात्रा में ग्राहक डेटा बरामद हुआ, जिसमें बैंक खातों की जानकारी, PAN नंबर, नाम और पते शामिल थे। पुलिस ने दावा किया कि गिरोह एक ही व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत कई SIM कार्ड का इस्तेमाल भी करता था।
करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन की जांच
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन लेनदेन की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है, ताकि कथित ठगी से जुड़े बैंक खाते, धन के हस्तांतरण और लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
जांच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी कथित गिरोह से जुड़ी कई शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। इससे पुलिस को आशंका है कि नेटवर्क ने अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाया हो सकता है।
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज, ग्राहक डेटा और वित्तीय लेनदेन की डिजिटल जांच कर रही है। जांच का अगला चरण यह पता लगाने पर केंद्रित रहेगा कि कॉल सेंटर का संचालन कब से हो रहा था, कितने लोगों से संपर्क किया गया और कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम किन खातों में पहुंचाई गई। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
