नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने बैंक अधिकारी बनकर क्रेडिट कार्ड धारक से कथित तौर पर ₹1.19 लाख की ठगी करने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को एक्सिस बैंक का ग्राहक सेवा अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया और क्रेडिट कार्ड पर ₹2,499 का वार्षिक रखरखाव शुल्क लगने की बात कही। शुल्क रद्द कराने और नया कार्ड जारी कराने के नाम पर पीड़ित को कथित तौर पर एक भुगतान ऐप डाउनलोड कराया गया और तीन यूपीआई लेनदेन कराए गए।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता यश शर्मा को 16 जुलाई को एक व्यक्ति का फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक्सिस बैंक का क्रेडिट कार्ड अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके कार्ड पर ₹2,499 का वार्षिक रखरखाव शुल्क लगाया गया है। शर्मा ने शुल्क रद्द करने की इच्छा जताई तो उन्हें बताया गया कि बैंक के ग्राहक सेवा विभाग से दूसरी कॉल आएगी।
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इसके बाद एक अन्य नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक का ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताया और दावा किया कि शुल्क रद्द करने तथा नया क्रेडिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया के लिए ‘CheQ’ ऐप डाउनलोड करना जरूरी है। पुलिस का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित को विश्वास में लेकर उसके खाते से रकम ट्रांसफर कराई गई।
जांच के मुताबिक, पीड़ित से ₹2,538.81, ₹58,647.68 और ₹58,647.68 के तीन यूपीआई भुगतान कराए गए। इन तीनों लेनदेन की कुल राशि ₹1,19,834.17 थी। आरोपियों ने कथित तौर पर एक फर्जी सेवा अनुरोध संख्या भी दी और बताया कि नया कार्ड चार घंटे में सक्रिय हो जाएगा तथा दो दिन के भीतर पहुंच जाएगा।
जब निर्धारित समय के बाद कार्ड नहीं पहुंचा तो शर्मा ने 17 जुलाई को एक्सिस बैंक के वास्तविक ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क किया। वहां उन्हें बताया गया कि उनके नाम से ऐसा कोई अनुरोध दर्ज नहीं किया गया था। इसके बाद उन्होंने कार्ड बंद कराया और साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में साइबर नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस ने जांच के दौरान कॉल विवरण, मोबाइल नंबरों, गूगल खाते से जुड़ी जानकारी, यूपीआई लेनदेन और लाभार्थी बैंक खातों का तकनीकी तथा वित्तीय विश्लेषण किया। जांच में कथित तौर पर लेनदेन का संबंध कोटक महिंद्रा बैंक के एक खाते से मिला, जो प्रिंस कुमार से जुड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इस खाते में पांच से सात दिनों के भीतर ₹12 लाख से अधिक के संदिग्ध लेनदेन दर्ज हुए थे।
जांच के आधार पर 20 वर्षीय प्रिंस कुमार को 15 सितंबर को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर अलीगढ़ के ही 21 वर्षीय विशाल तोमर और 27 वर्षीय विशाल राघव की भूमिका सामने आई। इसके बाद उत्तम नगर निवासी 40 वर्षीय संजय वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस का कहना है कि वर्मा पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम कर चुका था और वहीं से बैंक अधिकारियों की पहचान बताकर लोगों को ठगने का तरीका सीखने का आरोप है। जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह ‘Indy Number’ जैसे ऐप की मदद से ऐसे वर्चुअल नंबर तैयार करता था, जो बैंक के ग्राहक सेवा नंबरों जैसे दिखाई देते थे। इसके अलावा कथित तौर पर ‘CheQ’ के माध्यम से ठगी की रकम को आगे भेजा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में अलग-अलग लोगों की अलग-अलग भूमिकाएं हो सकती थीं। इनमें बैंक खाते उपलब्ध कराना, सिम कार्ड हासिल करना और एटीएम से रकम निकालना शामिल था। पुलिस के अनुसार, इस काम के बदले संबंधित लोगों को कमीशन दिए जाने का आरोप है।
पुलिस अब गिरोह से जुड़े दो अन्य संदिग्धों, बॉबी और अवतार, की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर पूरे वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने, संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान करने और गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी हैं।
