₹397.23 करोड़ के कथित फर्जी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का आरोप; टैक्स चोरी पर कार्रवाई तेज

₹60.59 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले में बड़ी कार्रवाई: स्मार्टफोन ट्रेडिंग कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार

Team The420
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नई दिल्ली। कर चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) के दिल्ली साउथ आयुक्तालय ने एक निजी लिमिटेड कंपनी के डायरेक्टर को ₹60.59 करोड़ के कथित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि स्मार्टफोन ट्रेडिंग से जुड़ी कंपनी ने ₹397.23 करोड़ के फर्जी बिलों के आधार पर अवैध रूप से आईटीसी का लाभ उठाया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कंपनी ने वस्तुओं की वास्तविक आपूर्ति किए बिना ही फर्जी चालान जारी किए और उन्हीं के आधार पर आईटीसी क्लेम किया। इस तरह सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।

फर्जी बिलों के जरिए आईटीसी लेने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार कंपनी ने बड़ी मात्रा में ऐसे इनवॉइस तैयार किए, जिनके पीछे वास्तविक लेनदेन का कोई प्रमाण नहीं था। इन फर्जी चालानों के माध्यम से आईटीसी का दावा किया गया और टैक्स देनदारी को कम दिखाया गया।

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बताया गया कि इस पूरे नेटवर्क में कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि जिन कंपनियों से खरीद दर्शाई गई, उनमें से कुछ का वास्तविक कारोबार बेहद सीमित था या वे संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी थीं।

इस तरह कथित तौर पर कागजों पर ही व्यापार दिखाकर टैक्स क्रेडिट हासिल करने का प्रयास किया गया।

जीएसटी कानून के तहत गंभीर अपराध

जांच अधिकारियों के अनुसार यह मामला केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 16 का उल्लंघन माना जा रहा है, जो इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों को निर्धारित करती है।

इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ धारा 132 के तहत भी कार्रवाई की गई है, जो कर चोरी और फर्जी चालान से जुड़े गंभीर अपराधों पर लागू होती है।

कानून के अनुसार यदि टैक्स चोरी या फर्जी आईटीसी का मामला ₹5 करोड़ से अधिक का होता है, तो इसे गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

विस्तृत जांच में सामने आए कई सुराग

सूत्रों के अनुसार इस मामले की जांच के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और डिजिटल लेनदेन की विस्तृत जांच की गई।

जांच में यह संकेत मिला कि फर्जी कंपनियों और संदिग्ध व्यापारिक संस्थाओं के माध्यम से एक जटिल नेटवर्क तैयार किया गया था, जिसके जरिए आईटीसी का अवैध लाभ लिया जा रहा था।

अधिकारियों ने बैंक खातों, व्यापारिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की भी जांच की, जिससे कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं हो सकता और इसमें अन्य कंपनियों या व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

कर चोरी के खिलाफ बढ़ी कार्रवाई

पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी प्रणाली के तहत फर्जी आईटीसी और नकली चालान के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। ऐसे मामलों में कई कारोबारी कागजी लेनदेन दिखाकर टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

इसी को देखते हुए कर विभाग ने डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए ऐसे मामलों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी इनवॉइसिंग और आईटीसी धोखाधड़ी से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है और बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होती है।

आगे भी हो सकती हैं गिरफ्तारियां

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आगे और खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों को संदेह है कि फर्जी चालान और आईटीसी के इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच की जा रही है और संबंधित दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कर चोरी और फर्जी बिलिंग के खिलाफ चल रही इस मुहिम के तहत विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि जीएसटी प्रणाली में पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

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