नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल-3 पर ड्यूटी फ्री दुकान में खरीदारी के दौरान पूरे परिवार के पासपोर्ट स्कैन किए जाने के आरोप ने यात्रियों की निजी जानकारी और डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय दंपती ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दावा किया कि परिवार के एक सदस्य ने शराब की बोतल खरीदी, लेकिन दुकान के कर्मचारियों ने खरीदारी नहीं करने वाले अन्य सदस्यों के पासपोर्ट भी स्कैन किए। इनमें नौ महीने के बच्चे और एक अन्य छोटे बच्चे के पासपोर्ट भी शामिल होने का दावा किया गया है।
दंपती के अनुसार, वे अमेरिका से दिल्ली पहुंचे थे। टर्मिनल-3 पर आव्रजन प्रक्रिया पूरी करने के बाद वे ड्यूटी फ्री दुकान पर गए। परिवार के एक सदस्य ने वहां शराब की बोतल खरीदी। खरीदारी की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों ने पासपोर्ट स्कैन करना शुरू किया। दंपती का आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल सामान खरीदने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों के पासपोर्ट भी स्कैन किए गए।
दंपती ने बताया कि उनके छोटे बच्चों ने दुकान से कोई सामान नहीं खरीदा था। इसके बावजूद उनके पासपोर्ट स्कैन किए जाने पर परिवार ने कर्मचारियों से इसका कारण पूछा। आरोप है कि कर्मचारियों ने पासपोर्ट स्कैन करने को उपलब्ध ‘ऑफर’ की जांच से जोड़कर बताया। इसके बाद परिवार को कुछ सामान पर छूट से संबंधित प्रस्ताव की जानकारी दी गई।
दंपती ने इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए पूछा कि किसी छूट या प्रस्ताव की जानकारी देने के लिए ऐसे यात्रियों के पासपोर्ट विवरण लेने की जरूरत क्यों पड़ी, जिन्होंने कोई खरीदारी नहीं की थी। उनका कहना है कि यदि खरीदारी केवल परिवार के एक सदस्य ने की थी तो अन्य सदस्यों, खासकर बच्चों के पहचान दस्तावेजों की जानकारी लेने का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए था।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दंपती ने आशंका जताई कि पासपोर्ट में दर्ज नाम, पहचान संबंधी विवरण और अन्य जानकारी संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा का हिस्सा है। उनका सवाल है कि यदि किसी यात्री ने दुकान से कोई सामान नहीं खरीदा है, तो उसके पासपोर्ट की जानकारी किस उद्देश्य से दर्ज की जाती है और उसका आगे इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
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दंपती ने यह भी चिंता जताई कि यात्रियों को ऐसी जानकारी एकत्र किए जाने के बारे में पर्याप्त जानकारी और स्पष्ट सहमति दी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पासपोर्ट स्कैन से प्राप्त जानकारी केवल तत्काल खरीदारी की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होती है या उसे किसी अन्य रिकॉर्ड या प्रणाली में भी सुरक्षित रखा जाता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि स्कैन किए गए दस्तावेजों से कौन-सी जानकारी दर्ज की गई और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
मामला सामने आने के बाद दिल्ली हवाईअड्डे के आधिकारिक सोशल मीडिया खाते से दंपती से संपर्क कर घटना से जुड़ी अधिक जानकारी साझा करने का अनुरोध किया गया। उन्हें मामले की जांच के लिए संपर्क नंबर और पासपोर्ट से संबंधित आवश्यक जानकारी आधिकारिक संपर्क माध्यम के जरिए उपलब्ध कराने को कहा गया। अधिकारियों की ओर से मामले की जांच कर आवश्यक सहायता देने की बात कही गई है।
फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि परिवार के सभी सदस्यों के पासपोर्ट स्कैन करना ड्यूटी फ्री दुकान की सामान्य प्रक्रिया थी या किसी विशेष परिस्थिति में ऐसा किया गया। यह भी सामने नहीं आया है कि कर्मचारियों को सभी यात्रियों के दस्तावेज स्कैन करने की अनुमति किस उद्देश्य से थी और क्या इस प्रक्रिया के बारे में यात्रियों को पहले से पर्याप्त जानकारी दी गई थी।
पासपोर्ट किसी यात्री की महत्वपूर्ण पहचान से जुड़ा दस्तावेज होता है। ऐसे में उसके विवरण की डिजिटल प्रतिलिपि या स्कैन किए जाने की प्रक्रिया में उद्देश्य, उपयोग, भंडारण और सुरक्षा से जुड़ी स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर बच्चों के दस्तावेज स्कैन किए जाने के दावे ने इस मामले में डेटा संरक्षण से जुड़े सवालों को और गंभीर बना दिया है।
दंपती की शिकायत के बाद अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि पासपोर्ट स्कैनिंग निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई थी या नहीं। साथ ही यह भी पता चलेगा कि स्कैन किए गए विवरण का रिकॉर्ड कहां रखा गया, किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया और क्या यात्रियों को इस प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई थी। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह नियमित प्रक्रिया थी या इसमें नियमों से हटकर कोई कार्रवाई हुई।
