देहरादून में सॉफ्टवेयर डील के नाम पर ₹2.5 करोड़ की ठगी, सोर्स कोड न देने और गोपनीय डेटा दुरुपयोग के आरोपों पर केस दर्ज हुआ।

देहरादून में सॉफ्टवेयर डील के नाम पर ₹2.5 करोड़ की ठगी, कॉर्पोरेट फ्रॉड और डेटा लीक के गंभीर आरोप

Team The420
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देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र में एक बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड और डेटा दुरुपयोग का मामला सामने आया है, जिसमें सॉफ्टवेयर डील के नाम पर करीब ₹2.5 करोड़ की कथित ठगी का आरोप लगाया गया है। आईटी पार्क सहस्रधारा रोड स्थित एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी की शिकायत पर केरल और कर्नाटक से जुड़े चार व्यक्तियों और एक निजी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में ठगी, मानहानि और गोपनीय डेटा के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे पूरे कारोबारी और आईटी सेक्टर में हलचल मच गई है।

शिकायतकर्ता कंपनी इनफोमो डिजिटल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राघवेंद्र अग्रवाल के अनुसार, यह विवाद वर्ष 2020 में शुरू हुआ था, जब कंपनी की होल्डिंग इकाई इनफोमो ग्लोबल लिमिटेड (सिंगापुर) के साथ एक सॉफ्टवेयर डील प्रस्तावित की गई थी। इस डील में “नंटियम सॉफ्टवेयर” को बेचने और विकसित करने का दावा किया गया था। आरोप है कि इस समझौते के तहत कंपनी की ओर से ₹35 लाख नकद और लगभग ₹2.5 करोड़ मूल्य के 17.5 लाख शेयर आरोपियों को ट्रांसफर किए गए थे।

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शिकायत के मुताबिक, भुगतान और शेयर ट्रांसफर के बाद भी आरोपियों ने सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड उपलब्ध नहीं कराया। इसके चलते सॉफ्टवेयर अपेक्षित रूप से काम नहीं कर सका और पूरी परियोजना असफल हो गई, जिससे निवेश की बड़ी राशि डूब गई। कंपनी का कहना है कि यह एक योजनाबद्ध धोखाधड़ी थी, जिसमें निवेश के नाम पर भरोसा जीतकर वित्तीय लाभ उठाया गया।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि समझौते के बाद आरोपियों ने अतिरिक्त धनराशि की मांग शुरू कर दी और दबाव बनाकर और पैसे वसूलने की कोशिश की गई। जब कंपनी ने यह मांग पूरी नहीं की, तो कथित रूप से कंपनी और उसके निदेशकों को बदनाम करने का अभियान चलाया गया। इसके लिए ईमेल और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर गलत सूचनाएं फैलाने का भी आरोप है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपियों ने कंपनी के निदेशकों के संवेदनशील दस्तावेज, जैसे पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस, बिना अनुमति के साझा किए, जिससे डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के गंभीर उल्लंघन का मामला सामने आया है। यह मामला अब साइबर और कॉर्पोरेट फ्रॉड दोनों पहलुओं से जांच के दायरे में आ गया है।

कंपनी ने बताया कि विवाद को सुलझाने के लिए जुलाई 2025 में दो कानूनी नोटिस भी भेजे गए थे, लेकिन आरोपियों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और राजपुर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में जिन व्यक्तियों और कंपनी का नाम शामिल है, उनमें समदीप वार्घशी, दिलीप रामचंद्रा अदिगा, संजू पुलियंकलाठ, हृषिकेश मेनन और एमएन शेट्ठी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का नाम दर्ज है। सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और डिजिटल लेनदेन तथा ईमेल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।

यह मामला न केवल वित्तीय ठगी का बल्कि कॉर्पोरेट डेटा सुरक्षा और सॉफ्टवेयर डील में पारदर्शिता की गंभीर खामियों को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सोर्स कोड और तकनीकी डिलीवरी की स्पष्ट शर्तें न होने पर निवेशक बड़े जोखिम में आ जाते हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला उत्तराखंड के आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में हाल के वर्षों के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में से एक माना जा रहा है।

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