5.51 करोड़ रुपये सीधे पीड़ितों को लौटाए गए, Skype कॉल और फर्जी नोटिस से ठग रहा था अंतरराष्ट्रीय गिरोह
अहमदाबाद, 28 सितंबर 2025 — भारत में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में गुजरात पुलिस ने 804 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस अभियान के तहत पुलिस ने 65 से अधिक पीड़ितों को 5.51 करोड़ रुपये सीधे लौटाए — जो देश में ऑनलाइन ठगी के मामलों में बेहद दुर्लभ और प्रतीकात्मक उपलब्धि मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा
जांच में “Rockcreek” नामक विदेशी कंपनी का नाम सामने आया, जिसे इस ठगी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर भारतीय नागरिकों से Skype वीडियो कॉल के ज़रिए संपर्क करते और नकली नोटिस दिखाकर उन्हें डराते थे। इसके बाद पीड़ितों को तथाकथित “सुरक्षित खातों” में पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था, जो असल में अपराधियों के नियंत्रण में थे।
पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क ने नकली डिजिटल पहचान और वैश्विक बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल कर चुराए गए पैसों को सीमा पार घुमाया।
Empanelment of Experts in Police Technology by Centre for Police Technology
पुलिस की कार्रवाई
गुजरात पुलिस की साइबर सेल ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करते हुए नेटवर्क का नक्शा तैयार किया। कई संदिग्ध खातों को फ्रीज़ किया गया है और जांच अभी जारी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ितों को प्रतीकात्मक चेक सौंपे गए। अधिकारियों ने इसे साइबर अपराध के खिलाफ “ऐतिहासिक रिकवरी” करार दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा:
“गुजरात पुलिस ने तकनीक का इस्तेमाल करके जिस तरह नागरिकों की मेहनत की कमाई बचाई है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा है। यह साबित करता है कि चाहे साइबर अपराध कितना भी बड़ा क्यों न हो, दृढ़ संकल्प और नवाचार से अपराधियों को बेनकाब किया जा सकता है।”
विशेषज्ञ का विश्लेषण
साइबरक्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस मामले को वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा बताया: “साइबर अपराध अब भूगोल तक सीमित नहीं है। अपराधी Skype, WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर डर पैदा करते हैं, फर्जी डिजिटल पहचान बनाते हैं और तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। जब तक देशों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और बैंकिंग निगरानी कड़ी नहीं होगी, ऐसे नेटवर्क बार-बार सामने आते रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि गुजरात पुलिस की यह सफलता दिखाती है कि राज्य-स्तरीय एजेंसियां भी तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के ज़रिए बड़े साइबर रैकेट ध्वस्त कर सकती हैं।
व्यापक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला न केवल ठगी के पैमाने के कारण ऐतिहासिक है, बल्कि इसलिए भी अहम है क्योंकि पीड़ितों को उनकी रकम सीधे लौटाई गई — जो साइबर अपराध के मामलों में शायद ही कभी देखने को मिलता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन संदेश देता है कि राज्य की पुलिस भी अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट्स के खिलाफ निर्णायक कदम उठा सकती है।
