MT-5 प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को फंसाया गया; देहरादून से नोएडा तक फैला संगठित रैकेट

₹800 करोड़ के क्रिप्टो निवेश घोटाले का खुलासा: देशभर में फैला साइबर फ्रॉड नेटवर्क बेनकाब

Roopa
By Roopa
5 Min Read

गाजियाबाद: क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर देशभर में फैले बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का एसटीएफ आगरा यूनिट और मसूरी पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड जतिंद्र राम को गिरफ्तार किया है, जिस पर ऑनलाइन ट्रेडिंग और नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर करीब ₹800 करोड़ की ठगी करने का आरोप है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी स्नातक तक शिक्षित है और पिछले सात–आठ वर्षों से ऑनलाइन ट्रेडिंग और नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़े कामों में सक्रिय था। वर्ष 2016 में उसने सोशल मीडिया के जरिए ट्रेडिंग की जानकारी हासिल की थी। इसके बाद 2022 में वह ‘सी प्राइम कैपिटल’ नामक कंपनी से जुड़ा और उसकी फ्रेंचाइजी हासिल कर ली। इसके बाद उसने तेजी से अपने नेटवर्क का विस्तार किया और कई राज्यों में निवेशकों को जोड़ना शुरू किया।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने देहरादून, नोएडा, मुजफ्फरनगर, रामनगर, मसूरी, अंबाला, फरीदाबाद, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे शहरों में मजबूत नेटवर्क तैयार किया। इस नेटवर्क के जरिए लोगों को क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म में निवेश के लिए आकर्षित किया जाता था और कम समय में अधिक मुनाफे का झांसा दिया जाता था।

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब 6 अप्रैल को मसूरी थाना क्षेत्र के गंगापुरम निवासी पंकज कुमार ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एजूकेंडल कंपनी से जुड़े लोगों ने क्रिप्टो निवेश में भारी रिटर्न का लालच देकर उनसे लगभग ₹55 लाख की ठगी की। इसी तरह जैतपुर, नई दिल्ली निवासी अमित नागर से भी करीब ₹2 करोड़ की धोखाधड़ी की शिकायत सामने आई।

इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि यह केवल एक सामान्य ठगी नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क है। जांच में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड तक इसके तार जुड़े पाए गए।

पुलिस के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगी निवेशकों को फंसाने के लिए एक विशेष ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म MT-5 का इस्तेमाल करते थे। इस प्लेटफॉर्म पर फर्जी मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। शुरुआत में छोटे-छोटे रिटर्न देकर विश्वास बनाया जाता था, जिसके बाद निवेशकों पर बड़ी रकम लगाने का दबाव बनाया जाता था।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

पूछताछ में यह भी सामने आया कि जतिंद्र राम डिजिटल मार्केटिंग और नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल का दुरुपयोग कर रहा था। वह एक मल्टी-लेवल रेफरल सिस्टम चलाता था, जिसमें नए निवेशक जोड़ने पर कमीशन दिया जाता था। इसी संरचना के कारण यह ठगी का नेटवर्क तेजी से फैलता गया।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर Triveni Singh ने ऐसे मामलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्रिप्टो और ऑनलाइन निवेश फ्रॉड आमतौर पर “सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी रिटर्न मॉडल” पर आधारित होते हैं। उनके अनुसार, अपराधी पहले छोटे लाभ दिखाकर भरोसा बनाते हैं और फिर निवेशकों को बड़ी रकम लगाने के लिए मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं, जिसके बाद पूरा नेटवर्क अचानक खत्म हो जाता है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो फर्जी कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठग रहे हैं। फिलहाल पुलिस फंड ट्रेल और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो निवेश के नाम पर इस तरह के फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां फर्जी प्लेटफॉर्म और अधिक मुनाफे के वादे के जरिए लोगों को फंसाया जाता है। शुरुआती लाभ देकर विश्वास बनाया जाता है और बाद में पूरी पूंजी हड़प ली जाती है।

फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।

हमसे जुड़ें

Share This Article