‘घोस्ट’ फिक्स्ड डिपॉजिट और संदिग्ध लेनदेन का मामला; सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंका पर जांच तेज

चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी खातों से ₹116 करोड़ की कथित हेराफेरी: आर्थिक अपराध विंग ने दर्ज की एफआईआर

Team The420
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) से जुड़े बैंक खातों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आने के बाद आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने लगभग ₹116.84 करोड़ की संदिग्ध हेराफेरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला उन कथित ‘घोस्ट’ फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा बताया जा रहा है, जो आधिकारिक बैंक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देने के कारण संदेह के घेरे में आ गए।

जानकारी के अनुसार यह धनराशि सेक्टर-32 स्थित एक निजी बैंक की शाखा में संचालित खातों से संबंधित बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद इसे गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में दर्ज किया गया है और अब पूरे लेनदेन की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

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नगर निगम आयुक्त की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला

सूत्रों के अनुसार नगर निगम आयुक्त की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में सार्वजनिक धन से जुड़े कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और संभावित धोखाधड़ी का उल्लेख किया गया है। शिकायत मिलने के बाद आर्थिक अपराध विंग ने प्रारंभिक जांच के आधार पर मामला दर्ज कर लिया।

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा होने के कारण अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है और इसकी गहन पड़ताल की जा रही है।

लंबे समय से चल रहा था संदिग्ध लेनदेन

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कथित अनियमितताएं मार्च 2025 से लेकर मार्च 2026 के बीच की अवधि में हुई बताई जा रही हैं। इसी दौरान कई ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट और खातों से जुड़ी जानकारी में विसंगतियां पाई गईं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ जमा राशियां बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थीं, जबकि संबंधित दस्तावेजों में उनका उल्लेख किया गया था। इसी वजह से इन फिक्स्ड डिपॉजिट को ‘घोस्ट एफडी’ कहा जा रहा है।

इस खुलासे के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि खातों और वित्तीय दस्तावेजों में हेरफेर कर सार्वजनिक धन को कहीं और स्थानांतरित किया गया हो सकता है।

दो नामजद आरोपी, अन्य की भूमिका की जांच

एफआईआर में मोहाली के नया गांव क्षेत्र के निवासी अनुभव मिश्रा को मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया है। इसके अलावा रिभव ऋषि का नाम भी मामले में सामने आया है।

जांच एजेंसियां फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित हेराफेरी में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ अन्य व्यक्तियों की संभावित भूमिका और वित्तीय संबंधों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य आरोपियों को भी शामिल किया जा सकता है।

बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध विंग बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रेल और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है।

जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि धनराशि किस तरह से स्थानांतरित हुई, क्या इसमें जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति की मिलीभगत भी इसमें शामिल थी।

सूत्रों के अनुसार बैंक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है ताकि लेनदेन की पूरी श्रृंखला को समझा जा सके और धन के वास्तविक प्रवाह का पता लगाया जा सके।

पांच दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश

मामले के सामने आने के बाद चंडीगढ़ के मेयर ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट जल्द सौंपने को कहा है।

मेयर का कहना है कि सार्वजनिक धन नागरिकों की संपत्ति है और उसके इस्तेमाल में किसी भी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग देने के निर्देश भी दिए हैं।

इसके साथ ही स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराने की सिफारिश भी की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि संबंधित खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की पूरी जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

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