लखनऊ। CBSE की जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा में सामान्य अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से दिव्यांग दिखाकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले में नौ आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी, राज किशोर, नीरज उर्फ रोहित, राम मिलन, सत्येंद्र कुमार, मनीष मिश्रा, अभिषेक यादव और दीपक कुमार शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल जेल से जमानत पर बाहर हैं। वहीं, गिरोह का कथित मुख्य सरगना कानपुर में दर्ज एक अन्य मामले में वांछित चल रहा है।
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से शुरू होता था खेल
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह सामान्य अभ्यर्थियों को दिव्यांग श्रेणी का लाभ दिलाने के लिए उनके नाम पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार करवाता था। इसके बाद भर्ती परीक्षा में संबंधित अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर को परीक्षा केंद्र पर बैठाया जाता था।
दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में निर्धारित अतिरिक्त समय का भी कथित तौर पर अनुचित लाभ उठाया जाता था। सॉल्वर इसी अतिरिक्त समय का इस्तेमाल प्रश्नपत्र हल करने के लिए करता था, जिससे सामान्य अभ्यर्थी को दिव्यांग कोटे से मिलने वाली सुविधा का फायदा मिल सके।
एक अभ्यर्थी से 10 से 15 लाख रुपये
पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया कि यह गिरोह परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने और भर्ती दिलाने के लिए मोटी रकम वसूलता था। प्रत्येक अभ्यर्थी से कथित तौर पर 10 से 15 लाख रुपये लिए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह की भूमिका केवल सॉल्वर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं थी। फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र की व्यवस्था करने से लेकर परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को बैठाने तक की पूरी प्रक्रिया कथित तौर पर पहले से तय तरीके से संचालित की जाती थी।
25 मार्च को परीक्षा केंद्र से गिरफ्तारी
उत्तर प्रदेश एसटीएफ को 22 से 25 मार्च के बीच आयोजित CBSE जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा में सेंधमारी की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने निगरानी बढ़ाई और 25 मार्च को लखनऊ के विकासनगर स्थित सेंट्रल एकेडमी परीक्षा केंद्र पर कार्रवाई की।
टीम ने कथित फर्जीवाड़े के दौरान नौ आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया। इसके बाद मामले में लखनऊ के गाजीपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर गिरोह के काम करने के तरीके तथा उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई गई।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
एसटीएफ जांच में नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के नाम भी आए
मामले में सबसे गंभीर सवाल स्थानीय पुलिस की आगे की जांच को लेकर उठे हैं। एसटीएफ की शुरुआती जांच के दौरान ऐसे कई अभ्यर्थियों के नाम सामने आने की बात कही गई थी, जिन्होंने कथित तौर पर इसी नेटवर्क की मदद से परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर पहले ही नौकरी हासिल कर ली थी।
हालांकि, बाद की पुलिस जांच उन अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे किसी अभ्यर्थी को मामले में आरोपी बनाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे जांच के दायरे और कार्रवाई की व्यापकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नौ आरोपियों पर दाखिल हुई चार्जशीट
पुलिस की चार्जशीट में मोठ, झांसी निवासी आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी और राज किशोर को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा नई दिल्ली के रोहिणी निवासी नीरज उर्फ रोहित, झांसी के पूंछ निवासी राम मिलन, लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार निवासी सत्येंद्र कुमार, झांसी निवासी मनीष मिश्रा, जालौन के कोंच निवासी अभिषेक यादव और अमेठी के मुसाफिरखाना निवासी दीपक कुमार को भी आरोपी बनाया गया है।
इन सभी के खिलाफ जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया है। फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
मुख्य सरगना दूसरे मामले में फरार
जांच में गिरोह के कथित मुख्य सरगना की भूमिका भी सामने आई है। हालांकि वह इस मामले में पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और कानपुर में दर्ज एक अन्य मामले में वांछित बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के बाद गिरोह के नेटवर्क, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले लोगों, सॉल्वर उपलब्ध कराने वालों और कथित तौर पर पहले नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों की भूमिका के संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया अब दाखिल चार्जशीट और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर चलेगी। भर्ती परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी का कथित दुरुपयोग सामने आने के बाद परीक्षा प्रणाली में प्रमाणपत्र सत्यापन और अभ्यर्थी की पहचान की जांच को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
