नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) में स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार के तौर पर कार्यरत Deputy Controller of Accounts को कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी ने एक निजी कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट का नवीनीकरण जल्द कराने के बदले शिकायतकर्ता से ₹15 लाख की रिश्वत मांगी थी। बातचीत के बाद कथित तौर पर ₹10 लाख में सौदा तय हुआ, जिसके बाद CBI ने जाल बिछाकर आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए गिरफ्तार किया।
CBI ने आरोपी की पहचान संदीप चौधरी के रूप में की है। एजेंसी के अनुसार, उसके खिलाफ 18 अगस्त 2026 को शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि निजी कंपनी के लंबित कॉन्ट्रैक्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के बदले आरोपी ने ₹15 लाख की मांग की थी। संबंधित फाइल आरोपी के पास लंबित होने का भी आरोप लगाया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद रिश्वत की मांग की पुष्टि करने के लिए कार्रवाई की योजना बनाई गई। CBI ने बताया कि बातचीत के दौरान आरोपी ₹15 लाख की शुरुआती मांग से घटकर ₹10 लाख की रिश्वत लेने पर सहमत हो गया। यह रकम कथित तौर पर निजी कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट की renewal file को जल्द process कराने के लिए मांगी गई थी।
CBI ने 18 अगस्त को आरोपी को पकड़ने के लिए trap operation चलाया। एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता से सीधे रकम लेने के बजाय अपनी पत्नी के जरिए ₹10 लाख की रिश्वत स्वीकार की। इसी दौरान CBI की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया। एजेंसी अब कथित रिश्वत लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने और मामले में अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।
CBI की कार्रवाई ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आरोपी केंद्र सरकार के एक मंत्रालय में वित्तीय जिम्मेदारी से जुड़े पद पर कार्यरत था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित रिश्वत की मांग केवल एक कॉन्ट्रैक्ट के नवीनीकरण तक सीमित थी या इससे जुड़े अन्य अधिकारियों अथवा व्यक्तियों की भी कोई भूमिका थी।
मामले में CBI आरोपी से कथित रिश्वत की रकम, कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल की फाइल और संबंधित सरकारी प्रक्रिया के बारे में पूछताछ कर रही है। एजेंसी यह भी जांच सकती है कि निजी कंपनी की फाइल किस स्तर पर लंबित थी और उसे जल्द आगे बढ़ाने के लिए किस प्रकार का कथित प्रभाव इस्तेमाल किया जाना था।
CBI की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल, आरोपी के खिलाफ लगाए गए रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप CBI की जांच का हिस्सा हैं। मामले में अंतिम दोष सिद्धि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
