मेरठ। पुरानी कारों की खरीद-बिक्री करने वाले मंच कार्स24 से करीब 3,100 ग्राहकों का गोपनीय निजी और कारोबारी डाटा कथित तौर पर चोरी कर प्रतिद्वंद्वी कंपनी और बाहरी डीलरों को बेचे जाने का मामला सामने आया है। कंपनी ने डाटा की चोरी और उसके कथित दुरुपयोग से करीब ₹5.70 करोड़ के वित्तीय नुकसान का अनुमान लगाया है।
कार्स24 के विधि प्रमुख श्यामल आनंद ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि कंपनी के वाहन खरीद-बिक्री कारोबार के दौरान जुटाई गई गोपनीय जानकारी को बिना अनुमति के हासिल कर लीक किया गया। शिकायत के मुताबिक, मार्च से अगस्त के बीच ग्राहकों का डाटा कथित तौर पर चोरी किया गया और बाद में पंजाब स्थित डायरेक्ट-कार्स को बेच दिया गया।
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कंपनी के अनुसार, लीक हुए डाटा में ग्राहकों और कारोबार से जुड़े संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि डाटा तक किस तरह पहुंच बनाई गई, संबंधित रिकॉर्ड तक किन लोगों की पहुंच थी और चोरी की गई जानकारी कथित तौर पर किन लोगों तक पहुंचाई गई।
ग्राहकों का कौन-सा डाटा हुआ चोरी?
शिकायत के अनुसार, चोरी किए गए डाटा में ग्राहकों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी, मोबाइल नंबर तथा उनके वाहनों से जुड़ी विस्तृत जानकारी शामिल थी। इसके अलावा ग्राहकों की नियुक्ति संबंधी जानकारी, वाहनों की निरीक्षण रिपोर्ट, ग्राहक लीड, मूल्य निर्धारण संबंधी जानकारी और कंपनी के अन्य गोपनीय कारोबारी रिकॉर्ड भी कथित तौर पर लीक किए गए।
इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल प्रतिद्वंद्वी कंपनियां और बाहरी डीलर सीधे उन ग्राहकों से संपर्क करने के लिए कर सकते हैं, जिन्होंने कार बेचने या खरीदने के लिए कार्स24 से संपर्क किया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि चोरी किए गए डाटा के जरिए ग्राहकों या कारोबारी अवसरों को दूसरी कंपनियों की ओर मोड़ा गया या नहीं।
प्रतिद्वंद्वी कंपनी के प्रतिनिधियों ने ग्राहकों से किया संपर्क
शिकायत के मुताबिक, डाटा चोरी का मामला उस समय सामने आया जब प्रतिद्वंद्वी कंपनी से जुड़े प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर कार्स24 के ग्राहकों से सीधे संपर्क करना शुरू किया।
इस मामले में प्रीति, पल्लवी, कल्पना, साहिल राणा और मोहित के नाम शिकायत में दर्ज किए गए हैं। कंपनी का आरोप है कि इन लोगों की भूमिका ग्राहकों के डाटा के कथित दुरुपयोग और प्रसार में रही।
कार्स24 को कुछ व्हाट्सऐप बातचीत भी मिली, जिनसे कथित तौर पर ग्राहकों की लीड साझा किए जाने के बारे में जानकारी सामने आई। कंपनी के आरोप के अनुसार, मोहित करीब ₹1,000 प्रति लीड की दर से ग्राहकों की लीड या संबंधित डाटा बेच रहा था।
पुलिस अब इन व्हाट्सऐप बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि डाटा किस माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंचा और क्या इसे एक से अधिक व्यक्तियों या कारोबारियों को बेचा गया।
₹5.70 करोड़ के नुकसान का अनुमान
कार्स24 ने ग्राहकों की जानकारी की कथित चोरी और उसके बाद हुए दुरुपयोग से करीब ₹5.70 करोड़ के वित्तीय नुकसान का अनुमान लगाया है। कंपनी के मुताबिक, इस आकलन में ग्राहकों की लीड के कथित रूप से दूसरी कंपनियों की ओर जाने और चोरी किए गए डाटा के कारोबारी मूल्य को शामिल किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डाटा तक केवल अनधिकृत पहुंच ही नहीं बनाई गई, बल्कि कथित तौर पर इसका इस्तेमाल कारोबारी फायदे के लिए भी किया गया। पुलिस अब वित्तीय लेनदेन, संचार रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक सीमा का पता लगाया जा सके।
कंपनी की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज किया गया है। प्रीति, पल्लवी, कल्पना, साहिल राणा और मोहित को मामले में आरोपी बनाया गया है।
डाटा चोरी के स्रोत की जांच तेज
जांच का मुख्य केंद्र अब यह पता लगाना है कि कार्स24 के सिस्टम से गोपनीय जानकारी कथित तौर पर किस माध्यम से निकाली गई। पुलिस संबंधित सिस्टम के प्रवेश रिकॉर्ड, लॉगिन गतिविधियों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। यह भी देखा जाएगा कि डाटा किसी अधिकृत कर्मचारी के खाते, चोरी हुए लॉगिन विवरण या किसी अन्य माध्यम से हासिल किया गया था।
जांच एजेंसियां डायरेक्ट-कार्स से कथित संबंध और नामजद आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका की भी पड़ताल करेंगी। डाटा का स्रोत, उसे दूसरे लोगों तक पहुंचाने का तरीका और उसके कारोबारी इस्तेमाल की सीमा जांच के अहम बिंदु होंगे।
यह मामला पुरानी कारों के कारोबार में ग्राहक लीड और व्यक्तिगत जानकारी के बढ़ते कारोबारी मूल्य को भी सामने लाता है। वाहन की जानकारी, निरीक्षण रिपोर्ट, नियुक्ति का रिकॉर्ड, कीमत और संपर्क नंबर जैसी सूचनाएं प्रतिद्वंद्वी कारोबारियों को संभावित ग्राहकों तक सीधे पहुंचने में मदद कर सकती हैं।
पुलिस के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप बातचीत, वित्तीय लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि ग्राहकों का डाटा कथित तौर पर कैसे हासिल किया गया, किसे बेचा गया और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
