कलकत्ता हाईकोर्ट ने ₹1000 करोड़ के कथित साइबर फ्रॉड केस में आरोपी राहुल वर्मा की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। कोर्ट ने डिजिटल सबूतों, म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और व्यापक नेटवर्क को गंभीर माना।

₹1000 करोड़ साइबर फ्रॉड केस में बड़ा झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड की अग्रिम जमानत ठुकराई

Team The420
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कोलकाता:  देश के सबसे बड़े कथित साइबर फ्रॉड मामलों में से एक में Calcutta High Court ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी राहुल वर्मा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आरोपी को “लगभग रंगे हाथों अपराध करते हुए पकड़ा गया” माना जा सकता है, ऐसे में उसे किसी भी प्रकार की राहत देना उचित नहीं होगा।

₹1000 करोड़ के कथित साइबर फ्रॉड की जांच

यह मामला करीब ₹1000 करोड़ के कथित साइबर फ्रॉड से जुड़ा है, जिसमें फर्जी निवेश योजनाएं, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए हजारों लोगों को निशाना बनाया गया और करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी केवल इस फ्रॉड का लाभार्थी नहीं था, बल्कि पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक और योजनाकार भी था। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की भूमिका अन्य सह-आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर है, इसलिए उसे समान आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

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आर्थिक अपराधों पर अदालत की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि आर्थिक अपराध समाज के व्यापक वर्ग को प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में जमानत देते समय विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है। अदालत के अनुसार, इस तरह के अपराध देश की आर्थिक व्यवस्था और आम नागरिकों के भरोसे पर सीधा असर डालते हैं।

जांच के दौरान सामने आया कि ठगी से प्राप्त रकम को पहले विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उसे कई शेल कंपनियों तथा निजी खातों के जरिए आगे बढ़ाया गया। इसके बाद कुछ धनराशि को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशों में मौजूद डिजिटल वॉलेट्स तक भेजा गया, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।

सैकड़ों शिकायतें और करोड़ों की ठगी

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े कम से कम 544 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें करीब ₹97 करोड़ की ठगी सामने आई। वहीं राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों में यह संख्या 1,300 से अधिक शिकायतों तक पहुंचती है, जिनमें कुल नुकसान ₹300 करोड़ से ज्यादा बताया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूरे नेटवर्क का वास्तविक आकार इससे भी कहीं बड़ा हो सकता है।

मामले में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने मोबाइल फोन और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए सीधे खातों को संचालित करता था और पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था। जांच में इस्तेमाल हुए IP एड्रेस को भी आरोपी के मोबाइल नंबर से जोड़ा गया है, जिससे उसके खिलाफ सबूत और मजबूत हुए हैं।

व्यापक साजिश के लिए नई FIR को कोर्ट ने उचित माना

कोर्ट ने यह भी माना कि पहले दर्ज एकल FIR के बाद जब बड़े स्तर पर साजिश सामने आई, तो व्यापक जांच के लिए नई FIR दर्ज करना उचित था। इस आधार पर अदालत ने अभियोजन की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि पूरे फ्रॉड नेटवर्क को उजागर करने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों, संभावित फरार होने के जोखिम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड ट्रांसफर जैसे पहलुओं को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने माना कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाती है, तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है या जांच को प्रभावित कर सकता है।

म्यूल अकाउंट्स और मल्टी-लेयर फंड ट्रांसफर का इस्तेमाल

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए तरीकों—जैसे म्यूल अकाउंट्स, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और मल्टी-लेयर फंड ट्रांसफर—यह दर्शाते हैं कि यह एक संगठित और सुनियोजित साइबर अपराध है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश स्कैम जैसे मामलों में तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग का खतरनाक संयोजन देखने को मिलता है। अपराधी पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें झूठे कानूनी डर या निवेश के लालच में फंसाकर पैसे ऐंठते हैं।

साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश

अदालत के इस फैसले को साइबर अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय संकेत देता है कि बड़े आर्थिक अपराधों में शामिल आरोपियों को आसानी से राहत नहीं मिलेगी, खासकर तब जब उनके खिलाफ ठोस डिजिटल और वित्तीय सबूत मौजूद हों।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस केस से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करेंगे।

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