ज्ञानपुर (भदोही)। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी का फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर एमबीबीएस में दाखिला और सरकारी नौकरियां दिलाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। भदोही पुलिस ने मामले में गिरोह के एक और कथित सदस्य नीतीश कुमार दुबे को गिरफ्तार किया है। आरोपी मिर्जापुर जिले के जिगना थाना क्षेत्र के बरी दुबे गांव का रहने वाला है। इस मामले में पुलिस इससे पहले गिरोह से जुड़े आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस के मुताबिक, ज्ञानपुर थाने में 20 सितंबर 2025 को शाहिद अली की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी के फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनके जरिए लाभ दिलाने वाले गिरोह के नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।
जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के एक कथित सदस्य शुभम सिंह को पहले गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने गिरोह के सरगना बताए जा रहे संजय दुबे को भी गिरफ्तार किया। दोनों से पूछताछ और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर मिर्जापुर के जिगना थाना क्षेत्र स्थित बरी दुबे गांव के नीतीश कुमार दुबे का नाम भी सामने आया।
पुलिस ने जानकारी जुटाने के बाद आरोपी की तलाश शुरू की और उसे जिगना थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि गिरोह फर्जी स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्र तैयार करता था। इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल एमबीबीएस में प्रवेश के साथ-साथ सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 की पुलिस भर्ती में भी ऐसे फर्जी प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की बात सामने आई है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने कितने फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए और इनके जरिए कितने अभ्यर्थियों को एमबीबीएस में प्रवेश या सरकारी नौकरी का लाभ दिलाने की कोशिश की गई। साथ ही, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों की सत्यापन प्रक्रिया और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क एक से अधिक राज्यों तक फैला हो सकता है। इसलिए गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर उन लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जिन्होंने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने, अभ्यर्थियों तक पहुंचाने या उनके आधार पर प्रवेश और भर्ती प्रक्रिया में लाभ दिलाने में कथित रूप से मदद की।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार नीतीश कुमार दुबे के पास से एक मोबाइल फोन और 700 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। बरामद मोबाइल की जांच के जरिए पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, संभावित लाभार्थियों और फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े लेनदेन या संपर्कों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नए आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर हुए संभावित दाखिलों और नियुक्तियों का सत्यापन भी कर सकती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गिरोह ने शिक्षा और सरकारी भर्ती व्यवस्था में किस स्तर तक सेंध लगाई थी।
