बेलगावी। कर्नाटक के बेलगावी में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां जांच के दौरान करीब 2,900 म्यूल बैंक अकाउंट की पहचान की गई है। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से हासिल पैसे को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने और कुछ मामलों में विदेशों तक भेजने के लिए कर रहे थे।
जांच से पता चला है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था। साइबर ठग बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाते थे और उन्हें कमीशन का लालच देकर नए बैंक खाते खुलवाने या अपने मौजूदा खातों की जानकारी साझा करने के लिए तैयार कर लेते थे। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में किया जाता था।
मामले की जांच के दौरान सामने आया कि कई खातों का इस्तेमाल लगातार कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन के लिए किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इन खातों के जरिए बड़ी रकम अलग-अलग खातों में घुमाई जाती थी और बाद में कुछ ट्रांजैक्शन विदेशों तक भेजे जाते थे, जिससे धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
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जांच के दौरान अधिकारियों ने कई ऐसे बैंक खातों को ब्लॉक कर दिया है, जिनका संबंध इस नेटवर्क से पाया गया। इसके साथ ही इन खातों से जुड़े लेनदेन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं और यह नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था।
इस मामले में दर्ज कई शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान चार अलग-अलग मामलों को दर्ज किया गया, जिनके जरिए यह पता चला कि साइबर अपराधी लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपने जाल में फंसा रहे थे। कई मामलों में लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि वे किसी वैध वित्तीय गतिविधि का हिस्सा बन रहे हैं, जबकि असल में उनके बैंक खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
एक मामले में बेलगावी के एक युवक ने कथित तौर पर नौ अलग-अलग बैंक खाते खोले थे और उन्हें कमीशन के बदले साइबर ऑपरेटरों को सौंप दिया था। जांच में पता चला कि इन खातों के जरिए करीब ₹80 लाख का लेनदेन हुआ। अधिकारियों का मानना है कि यह रकम साइबर ठगी के विभिन्न मामलों से जुड़ी हो सकती है।
एक अन्य मामले में विदेश में काम कर रहे एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी मां के जरिए एक स्वयं सहायता समूह के नाम पर बैंक खाता खुलवाया था। बाद में इसी खाते का इस्तेमाल धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि साइबर ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचते थे। वे फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम जॉब, ऑनलाइन काम और कमीशन आधारित योजनाओं का लालच देकर लोगों को विश्वास दिलाते थे कि वे किसी वैध ऑनलाइन कमाई योजना का हिस्सा बन रहे हैं।
एक बार जब लोगों से बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग एक्सेस मिल जाता था, तो इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े पैसे को ट्रांसफर करने में किया जाता था। इस तरह के खातों को आम तौर पर “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल अपराधी अपने वित्तीय लेनदेन को छिपाने के लिए करते हैं।
इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के संचालन में शामिल मुख्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और क्या इसके तार देश के अन्य हिस्सों या विदेशों से भी जुड़े हुए हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल बैंक अकाउंट साइबर ठगी के नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। अपराधी सीधे पैसे लेने के बजाय कई खातों के जरिए रकम घुमाते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
जांच एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग एक्सेस साझा न करें। इसके अलावा संदिग्ध जॉब ऑफर, कमीशन आधारित ट्रांजैक्शन स्कीम या बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़े किसी भी प्रस्ताव की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की सलाह दी गई है।
