बस्ती। वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोप में एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि जांच में महिला द्वारा लोगों को कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाकर निजी बातचीत, वीडियो कॉल और अन्य सामग्री के जरिए दबाव बनाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इसी तरीके से थानाध्यक्ष को भी कथित तौर पर ब्लैकमेल किया गया और उनसे एक करोड़ रुपये की मांग की गई। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक बोलेरो और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
57 वर्षीय सूर्य प्रकाश सिंह मूल रूप से आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा गांव के रहने वाले थे। वह करीब चार साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे। परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं। सिद्धार्थनगर से स्थानांतरण के बाद उन्हें बस्ती में तैनाती मिली थी। 18 अप्रैल 2026 को उन्हें वाल्टरगंज थाने का प्रभारी बनाया गया था।
29 अगस्त को सरकारी आवास में मिला शव
29 अगस्त को सूर्य प्रकाश सिंह का शव कलेक्ट्रेट के पास स्थित उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला था। घटना के बाद आत्महत्या के कारणों को लेकर जांच शुरू हुई। बताया गया कि घटना से पहले उन्होंने अपने निजी मोबाइल नंबर पर वाट्सऐप स्टेटस लगाया था, जिसमें धन-संपदा के साथ शांति और प्रेम को अधिक महत्व देने की बात लिखी थी। उनकी मौत के बाद परिवार की शिकायत और पुलिस की जांच में कथित ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना का पहलू सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, परिवार से पूछताछ, निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के दौरान थानाध्यक्ष और आरोपितों के बीच संपर्क की जानकारी मिली। इसके बाद प्रियंका चौधरी, रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश को रविवार सुबह सदर अस्पताल के सामने से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि अधिवक्ता विजय प्रकाश कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग से जुड़ी रकम की वसूली में भूमिका निभाता था।
महिला पर प्रेमजाल में फंसाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के गांधार में रहती थी और करीब 10 वर्ष पहले अपने पति से अलग हो गई थी। जांच में उसके मुंबई में सौंदर्य केंद्रों और मालिश केंद्रों में काम करने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस का आरोप है कि वह आर्थिक रूप से संपन्न लोगों से संपर्क बढ़ाकर उन्हें कथित तौर पर प्रेमजाल में फंसाती थी।
इसके बाद निजी बातचीत, वीडियो कॉल और चैट के माध्यम से उनसे संपर्क बनाए रखने तथा कथित तौर पर इसी सामग्री का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए करने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ऐसे कितने लोग उसके संपर्क में आए और उनसे कितनी रकम की मांग या वसूली की गई।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
हाथ की नस काटने का वीडियो दिखाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, प्रियंका कथित तौर पर लोगों पर मानसिक दबाव बनाने के लिए वीडियो कॉल पर अपने हाथ की नस काटने और खुद को नुकसान पहुंचाने का दृश्य दिखाती थी। आरोप है कि इस तरीके से सामने वाले व्यक्ति को डराकर रकम की मांग की जाती थी। पुलिस का दावा है कि रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश भी कथित वसूली में सहयोग करते थे।
जांच में तीन अन्य लोगों से करीब 24 लाख रुपये की कथित वसूली की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इनमें एक चिकित्सक भी शामिल बताया गया है। पुलिस अब इन मामलों की भी जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित नेटवर्क में अन्य लोग तो शामिल नहीं थे।
थानाध्यक्ष से एक करोड़ रुपये मांगने का दावा
पुलिस जांच के अनुसार, वाल्टरगंज क्षेत्र में तैनाती के दौरान सूर्य प्रकाश सिंह और प्रियंका के बीच जान-पहचान हुई थी। दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर निजी संबंध बने। इसके बाद आरोप है कि प्रियंका और उसके सहयोगियों ने थानाध्यक्ष पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त को दोपहर करीब 1:41 बजे अधिवक्ता विजय प्रकाश की सूर्य प्रकाश सिंह से फोन पर बातचीत हुई थी। आरोप है कि इस दौरान उनसे एक करोड़ रुपये की मांग की गई। पुलिस का दावा है कि इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था कर पाना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। हालांकि पुलिस को अब इस घटनाक्रम में कथित ब्लैकमेलिंग और आत्महत्या के बीच संबंध को साक्ष्यों के आधार पर स्थापित करना होगा।
सीडीआर और मोबाइल से जांच को मिलेगी दिशा
पुलिस मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, संदेश और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। इनसे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि थानाध्यक्ष और आरोपितों के बीच संपर्क कब शुरू हुआ, कितनी बार बातचीत हुई और घटना से पहले किस तरह का दबाव बनाया गया।
इसके साथ ही पुलिस कथित आर्थिक लेनदेन की भी जांच कर रही है। बैंक खातों, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि आरोपितों की ओर से किसी रकम की मांग या वसूली की गई थी या नहीं।
तीनों आरोपित जेल भेजे गए
पुलिस ने प्रियंका चौधरी, रामनयन चौधरी और विजय प्रकाश को गिरफ्तार कर मुकदमा अपराध संख्या 387/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 और 3(5) में कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। एक बोलेरो और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
फिलहाल पुलिस कथित हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग, आर्थिक वसूली और आत्महत्या से पहले की परिस्थितियों की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरफ्तार तीन आरोपितों के अलावा इस पूरे घटनाक्रम में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। आरोपितों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
