नौकरी हासिल करने के लिए मूक-बधिर प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप; दिल्ली पुलिस ने बरेली में की कार्रवाई, सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली और प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था भी जांच के घेरे में

फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का खेल बेनकाब, सीएमओ कार्यालय का आउटसोर्स ऑपरेटर दो युवकों संग हिरासत में

Roopa
By Roopa
6 Min Read

बरेली। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार कराने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बरेली में कार्रवाई करते हुए सीएमओ कार्यालय के आउटसोर्स ऑपरेटर कुलदीप यादव समेत दो युवकों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि हरियाणा निवासी एक युवक के लिए मूक-बधिर श्रेणी का फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र तैयार कराया गया था। यह प्रमाण पत्र दिल्ली में नौकरी हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्र पर संदेह होने के बाद मामला सामने आया और जांच दिल्ली पुलिस तक पहुंची।

पुलिस ने शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में तैनात आउटसोर्स ऑपरेटर कुलदीप यादव और उसके एक साथी को हिरासत में लिया। शनिवार को दोनों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान प्रमाण पत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जानकारी जुटाई। ईएनटी सर्जन और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के भौतिक सत्यापन से जुड़े नोडल अधिकारी के बयान भी दर्ज किए गए। इसके बाद पुलिस टीम आगे की जांच के लिए पीलीभीत रवाना हो गई।

जांच में सामने आया कि फरीदाबाद निवासी ललित कुमार ने हरियाणा निवासी युवक का मूक-बधिर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बरेली सीएमओ कार्यालय में तैनात कुलदीप यादव से संपर्क किया था। आरोप है कि नौकरी के उद्देश्य से तैयार कराया गया यह प्रमाण पत्र संबंधित प्रक्रिया में इस्तेमाल किया गया। दिल्ली में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान प्रमाण पत्र की जानकारी और रिकॉर्ड में अंतर सामने आने के बाद इसकी जांच शुरू हुई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की पड़ताल शुरू की।

मामले ने बरेली के सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हिरासत में लिया गया कुलदीप यादव मूल रूप से आउटसोर्सिंग के माध्यम से चतुर्थ श्रेणी के सपोर्ट स्टाफ पद पर तैनात हुआ था। हालांकि, कुछ समय पहले उसे दिव्यांगता पटल पर ऑपरेटर की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। बताया गया है कि इस दौरान वहां पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को उनकी मूल तैनाती पर भेज दिया गया था। अब जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कुलदीप को ऑपरेटर की जिम्मेदारी किस प्रक्रिया के तहत दी गई और उसे प्रमाण पत्र से संबंधित काम करने का अधिकार किस स्तर तक मिला था।

दिव्यांगता पटल से हटाए गए मूल कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रमाण पत्र तैयार करने और संबंधित रिकॉर्ड में किसी तरह की हेरफेर हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति ने सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग तो नहीं किया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

फिजिकल वेरिफिकेशन से जुड़े ईएनटी सर्जन ने बताया कि मूक-बधिरता की जांच सामान्य तौर पर ऑडियोलॉजिस्ट द्वारा की जाती है, लेकिन पद रिक्त होने के कारण यह जिम्मेदारी उन्हें दी गई है। उनके अनुसार अस्पताल में संबंधित जांच के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मरीज का भौतिक सत्यापन करने के बाद उसे उच्च केंद्र भेजा जाता है। वहां से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में आधार सत्यापन की जिम्मेदारी ऑपरेटर स्तर पर होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि संबंधित युवक की पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किस तरह किया गया था। यदि प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से तैयार किया गया, तो यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी अभिलेखों में उसकी प्रविष्टि कैसे हुई और किस स्तर पर उसे आगे बढ़ाया गया।

मामला सामने आने के बाद सीएमओ कार्यालय ने भी अपने स्तर से प्रमाण पत्रों की जांच शुरू करने की तैयारी की है। सीएमओ ने बताया कि दिल्ली पुलिस को आउटसोर्स कर्मचारी कुलदीप यादव से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही अब तक जारी किए गए दिव्यांग प्रमाण पत्रों की रैंडम जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अन्य प्रमाण पत्रों में भी किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल एक प्रमाण पत्र तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। पुलिस प्रमाण पत्र तैयार कराने वाले लोगों, कार्यालय में उसकी प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों और दस्तावेजों के सत्यापन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किस नौकरी के लिए किया गया और उससे संबंधित चयन प्रक्रिया में इसका क्या प्रभाव पड़ा।

फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में किन-किन लोगों की भूमिका थी और सरकारी व्यवस्था का किस स्तर पर दुरुपयोग किया गया। सीएमओ कार्यालय की ओर से जारी प्रमाण पत्रों की रैंडम जांच के निर्देश के बाद अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रक्रिया में कहीं व्यापक स्तर पर अनियमितता तो नहीं हुई।

हमसे जुड़ें

Share This Article