बड़ौत। बागपत के बड़ौत में ऑनलाइन शॉपिंग के डिलीवरी गोदाम से करीब ₹77 लाख कीमत के महंगे मोबाइल फोन और अन्य सामान के कथित गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि गोदाम का मैनेजर अपने चार साथियों के साथ मिलकर लंबे समय से पार्सल में हेराफेरी कर रहा था। गिरोह महंगे सामान का ऑनलाइन ऑर्डर करता था और पार्सल पहुंचने के बाद उसमें से असली उत्पाद निकालकर उसकी जगह सस्ता या खराब सामान रख देता था। इसके बाद पैकेट को रिटर्न कर दिया जाता था। कंपनी के आंतरिक ऑडिट में लगातार बढ़ रही रिटर्न और कैंसिलेशन की संख्या संदिग्ध मिलने के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड को लॉजिस्टिक सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी इंस्टाकार्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर रामभवन सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि बागपत, बड़ौत और खेकड़ा में कंपनी के डिलीवरी गोदाम संचालित हैं। बड़ौत गोदाम से पिछले करीब डेढ़ साल से ऑनलाइन ऑर्डर असामान्य रूप से अधिक संख्या में रद्द होकर वापस लौट रहे थे। रिटर्न होने वाले पैकेटों में छेड़छाड़ की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही थीं।
कंपनी ने जब पिछले 18 महीनों के रिकॉर्ड और पार्सल की जांच की तो एप्पल समेत कई नामी कंपनियों के महंगे मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान गायब मिले। उनकी जगह कम कीमत वाले या खराब उत्पाद रखे गए थे। शुरुआती जांच में इससे कंपनी को ₹77 लाख से अधिक का सीधा वित्तीय नुकसान होने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। इसमें कथित तौर पर आरोपियों द्वारा कैमरों का दृश्य बाधित करने के लिए उनके सामने बैग या अन्य सामान रखे जाने की बात सामने आई। इसके बाद पार्सल खोलकर महंगे मोबाइल और दूसरे सामान निकालने का आरोप है। कैमरों की निगरानी से बचने के लिए यह तरीका लगातार इस्तेमाल किए जाने की आशंका है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
आरोपियों पर सिर्फ कंपनी के सामान में ही नहीं, बल्कि ग्राहकों के ऑर्डर में भी हेराफेरी करने का आरोप है। जांच के अनुसार, जिन ग्राहकों ने सामान के लिए पहले ही ऑनलाइन भुगतान कर दिया था, उनके पार्सल भी गोदाम में खोले जाते थे। कथित तौर पर महंगा और असली सामान निकालकर उसकी जगह खराब या घटिया उत्पाद रख दिया जाता था। डिलीवरी के दौरान ग्राहक सामान की स्थिति देखकर उसे लेने से इनकार कर देता था। इसके बाद पैकेट रिटर्न होकर दोबारा गोदाम पहुंच जाता और कथित तौर पर असली महंगा सामान आरोपियों के पास रह जाता था।
कंपनी की शिकायत पर पुलिस ने बड़ौत गोदाम के मैनेजर आशीष चौधरी, उसके साथी अभिषेक, विवेक और हिमांशु निवासी आजाद नगर, बड़ौत तथा अनिल निवासी बड़ौदा, मुजफ्फरनगर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। कुछ अज्ञात लोगों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर संदिग्धों से पूछताछ की है और गोदाम के रिकॉर्ड, पार्सल विवरण तथा सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, ई-कॉमर्स गोदामों में इस तरह की धोखाधड़ी केवल सामान की चोरी तक सीमित नहीं रहती। यदि कर्मचारी ऑर्डर, रिटर्न और भुगतान प्रक्रिया में मिली आंतरिक पहुंच का दुरुपयोग करें तो इससे कंपनी के साथ ग्राहकों को भी आर्थिक नुकसान हो सकता है। ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, पार्सल की आवाजाही, कर्मचारी लॉगिन, सीसीटीवी और भुगतान से जुड़े आंकड़ों का मिलान कर पूरे नेटवर्क की पहचान करना महत्वपूर्ण होता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड और लेनदेन की विस्तृत जांच के बाद नुकसान की वास्तविक रकम सामने आएगी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित फर्जीवाड़े में कितने पार्सल और कितने कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद मामले का पूरा खुलासा किया जाएगा।
