आगरा में कथित फर्जी मेडिकल रिपोर्ट मामले में अस्पताल संचालक और दो डॉक्टरों समेत पांच लोगों के खिलाफ अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सैकड़ों एजेंट, हजारों निवेशक और करोड़ों का खेल; अमर ज्योति चिटफंड की जांच EOW को सौंपने की तैयारी

Roopa
By Roopa
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बदायूं। अमर ज्योति चिटफंड कंपनी से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। बदायूं पुलिस की अब तक की जांच में कंपनी से जुड़े मामलों में करीब ₹25 से ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी के साक्ष्य सामने आने के बाद अब मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपे जाने की संभावना है। घोटाले की कुल रकम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे करीब ₹100 करोड़ का मामला बता रहे हैं, जबकि कुछ दावों में कथित घोटाले की रकम ₹500 करोड़ तक बताई जा रही है। हालांकि, इन बड़े आंकड़ों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल मामले की जांच बदायूं पुलिस कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है और मामले के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच में जैसे-जैसे नए वित्तीय लेनदेन और निवेशकों से जुड़ी जानकारी सामने आएगी, कथित घोटाले की वास्तविक रकम और नेटवर्क का दायरा भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मामला बड़ी रकम से जुड़ा होने के कारण आर्थिक अपराध की जांच के लिए इसे EOW या अपराध शाखा अपराध अनुसंधान विभाग (CBCID) को सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी जांच स्थानांतरित करने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे फैसला लिया जा सकता है।

पुलिस के अनुसार, बरेली के कटरा चांदखां निवासी शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य पर अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम से चिटफंड कंपनी संचालित करने का आरोप है। आरोप है कि कंपनी के नेटवर्क से जुड़े सैकड़ों एजेंटों के जरिए बदायूं और बरेली समेत आसपास के क्षेत्रों में लोगों को निवेश के लिए जोड़ा गया। निवेशकों को कंपनी की योजनाओं में रकम जमा कराने के लिए प्रेरित किया गया और इस प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया।

आरोप है कि निवेशकों से रकम लेने के बाद उन्हें उनकी जमा राशि या वादे के अनुसार लाभ नहीं मिला। भुगतान में परेशानी आने और रकम वापस नहीं मिलने के बाद निवेशकों की ओर से शिकायतें सामने आने लगीं। इसके बाद पुलिस ने अलग-अलग मामलों में जांच शुरू की। मुकदमों की जांच के दौरान बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई तो कथित धोखाधड़ी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंचती दिखाई दी।

बदायूं से जुड़े मामलों में अब तक करीब ₹25 से ₹30 करोड़ की धोखाधड़ी के साक्ष्य मिलने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। यह रकम उन मामलों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित है, जिनकी पुलिस ने अब तक जांच की है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे कथित घोटाले की रकम इतनी ही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी के माध्यम से कुल कितनी रकम जुटाई गई और कितने निवेशक इससे प्रभावित हुए।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

घोटाले की कुल रकम को लेकर सामने आ रहे ₹100 करोड़ से ₹500 करोड़ तक के दावों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि विस्तृत वित्तीय जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस अब कंपनी के खातों, एजेंटों के माध्यम से जमा कराई गई रकम और निवेशकों से संबंधित रिकॉर्ड को खंगाल रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि जमा की गई रकम किन खातों में गई और बाद में उसका इस्तेमाल या स्थानांतरण किस तरह किया गया।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कंपनी के एजेंटों का नेटवर्क भी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कितने एजेंट कंपनी के लिए काम कर रहे थे, उन्होंने कितने लोगों से संपर्क किया और निवेश के नाम पर कितनी रकम जुटाई। यदि अलग-अलग जिलों से जुड़े निवेशकों और लेनदेन के प्रमाण मिलते हैं तो मामले का दायरा बदायूं और बरेली से आगे भी बढ़ सकता है।

मामले में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनके संपर्कों, दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रही है। बैंक खातों और निवेश संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई रकम का अंतिम उपयोग कहां हुआ। जांच में सामने आने वाले वित्तीय रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।

बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार, फिलहाल अमर ज्योति चिटफंड मामले की जांच बदायूं पुलिस कर रही है और मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। अभी जांच स्थानांतरित करने की आवश्यकता सामने नहीं आई है। हालांकि, आगे जांच में ऐसा कोई मुद्दा सामने आता है तो शासन की मंजूरी के बाद जांच EOW या CBCID को सौंपी जा सकती है।

फिलहाल जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल कथित घोटाले की वास्तविक रकम, प्रभावित निवेशकों की संख्या और कंपनी के पूरे वित्तीय नेटवर्क को लेकर है। ₹25-30 करोड़ की धोखाधड़ी के साक्ष्यों से शुरू हुई जांच में यदि दूसरे जिलों और राज्यों के निवेशकों तथा खातों के संबंध सामने आते हैं, तो अमर ज्योति चिटफंड मामले का वास्तविक दायरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है।

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