सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT की जांच में फोरेंसिक ऑडिटर भी शामिल; लॉकर्स पर लगाए गए टैग और QR कोड स्कैन करते ही सामने आएगी अंदर रखी वस्तुओं की सूची, रिकॉर्ड मिलान के लिए बार-बार लॉकर खोलने की जरूरत नहीं

रामलला के आभूषणों की सुरक्षा व्यवस्था और सख्त, SBI लॉकर्स की हुई कोडिंग

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By Roopa
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अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने रामलला के बहुमूल्य आभूषणों और मूल्यवान धातुओं की सुरक्षा व्यवस्था को और व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT पूरे घटनाक्रम से जुड़े रिकॉर्ड और लेनदेन की गहनता से जांच कर रही है। जांच के दौरान बैंक और राम मंदिर ट्रस्ट के अभिलेखों के मिलान के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।

जांच टीम में फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया है। ऑडिटर की मौजूदगी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड, ट्रस्ट के दस्तावेज और लॉकर में सुरक्षित रखी वस्तुओं के विवरण के बीच किसी भी तरह की विसंगति का पता लगाना है। इसी प्रक्रिया के तहत उन बैंक लॉकर्स की कोडिंग कराई गई है, जिनमें रामलला को श्रद्धालुओं की ओर से समर्पित बहुमूल्य आभूषण और मूल्यवान धातुएं सुरक्षित रखी गई हैं।

अलग-अलग लॉकर्स में रखे गए हैं बहुमूल्य सामान

जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा रामलला को अर्पित की गई कीमती धातुएं, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं बैंक के अलग-अलग लॉकर्स में सुरक्षित रखी गई हैं। राम मंदिर ट्रस्ट इन लॉकर्स के इस्तेमाल के लिए बैंक को निर्धारित शुल्क का भुगतान करता है। प्रत्येक लॉकर में रखी वस्तुओं की सूची तैयार कर उसे संबंधित अभिलेखों में दर्ज किया गया है। इन रिकॉर्ड की प्रतियां बैंक प्रबंधन और राम मंदिर ट्रस्ट दोनों के पास सुरक्षित हैं।

अब सुरक्षा और रिकॉर्ड सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए लॉकर्स पर अलग-अलग टैग लगाए गए हैं। इन टैग में QR कोड जैसी डिजिटल पहचान व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया है। संबंधित कोड को स्कैन करने पर उस लॉकर में रखी वस्तुओं का रिकॉर्ड सामने आ सकेगा। इससे अधिकारियों को लॉकर खोले बिना उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ विवरण का मिलान करने में सुविधा होगी।

बार-बार लॉकर खोलने की जरूरत नहीं

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य भौतिक सत्यापन के दौरान लॉकर्स को बार-बार खोलने की आवश्यकता को कम करना है। पहले रिकॉर्ड से मिलान करने के लिए लॉकर खोलकर उसमें रखी वस्तुओं को बाहर निकालना, उनकी पहचान और गिनती करना तथा फिर उन्हें व्यवस्थित तरीके से वापस रखना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय भी लगता था और मूल्यवान वस्तुओं को बार-बार बाहर निकालने की आवश्यकता होती थी।

अब डिजिटल टैग के जरिए प्राथमिक स्तर पर रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर रैंडम चेकिंग के दौरान संबंधित टैग या QR कोड स्कैन कर लॉकर में दर्ज वस्तुओं की सूची देखी जा सकेगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ रिकॉर्ड की निगरानी भी अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

SIT की टीम इस प्रक्रिया के लिए करीब दो दिनों तक अयोध्या में रही। लॉकर्स पर टैग और कोडिंग का काम पूरा होने के बाद टीम वापस लौट गई। हालांकि, पूरे मामले की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

पहले भी कराई गई थी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी

इससे पहले राम मंदिर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने ट्रस्ट के सहयोगियों के साथ बैंक के अभिलेखों की विस्तृत जांच की थी। टीम ने करीब एक पखवाड़े तक बैंक में रहकर रिकॉर्ड और लॉकर में सुरक्षित बहुमूल्य वस्तुओं का मिलान कराया। इस दौरान सभी लॉकर्स में रखी मूल्यवान वस्तुओं की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई।

हर वस्तु का अलग रिकॉर्ड तैयार कराया गया और उसकी एक प्रति ट्रस्ट कार्यालय तथा दूसरी बैंक प्रबंधन के पास सुरक्षित रखी गई। इसी अवधि में बैंक के क्षेत्रीय और जोनल अधिकारियों ने भी विभागीय जांच की और अपनी अलग रिपोर्ट तैयार कर प्रबंधन को भेजी।

इसके अलावा बैंक की ओर से एक सर्कुलर जारी कर सुरक्षा सेवा उपलब्ध कराने वाली एजेंसी के साथ अनुबंध समाप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब SIT की जांच में बैंक रिकॉर्ड, ट्रस्ट के अभिलेख, लॉकर में सुरक्षित वस्तुओं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं को जोड़कर देखा जा रहा है। डिजिटल कोडिंग की नई व्यवस्था को इसी व्यापक रिकॉर्ड-सत्यापन और सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

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