पंचकूला में दो अलग-अलग साइबर ठगी मामलों में ITBP कर्मी समेत दो लोगों से करीब ₹15 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।

पंचकूला में साइबर ठगी के दो मामले, आईटीबीपी कर्मी समेत दो लोगों से ₹15 लाख ऐंठे

Team The420
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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों में आईटीबीपी के एक कर्मचारी समेत दो लोगों से कुल ₹15 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक मामले में पीड़ित को बैंक कर्मचारी बनकर फोन किया गया और क्रेडिट कार्ड दिलाने के नाम पर मोबाइल में संदिग्ध एपीके फाइल डाउनलोड कराई गई। इसके बाद उसके क्रेडिट कार्ड से तीन अनधिकृत लेन-देन किए गए। दूसरे मामले में बीमा पॉलिसी से जुड़ी रकम वापस दिलाने का झांसा देकर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में ₹13 लाख ट्रांसफर कराए गए।

पहला मामला सूरजपुर निवासी 51 वर्षीय आईटीबीपी कर्मी से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 19 जून को एक व्यक्ति ने खुद को पंजाब नेशनल बैंक का कर्मचारी बताते हुए पीड़ित से संपर्क किया। कॉल करने वाले ने क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने में मदद करने की बात कही और इसके लिए ‘पीएनबी डॉट एपीके’ नाम की एक एप्लीकेशन भेजी। पीड़ित ने कथित तौर पर उस फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया।

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इसके बाद उसके आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड से तीन अनधिकृत लेन-देन किए गए। पुलिस के अनुसार, ₹80,000, ₹69,000 और ₹80,000 की रकम से जेप्टो मार्केटप्लेस पर खरीदारी की गई। इन लेन-देन का कुल मूल्य ₹2.29 लाख बताया गया है। हालांकि शिकायत में पीड़ित को लगभग ₹2 लाख के नुकसान की बात सामने आई है। एपीके फाइल इंस्टॉल कराने और उसके बाद क्रेडिट कार्ड से हुए लेन-देन के बीच संबंध की जांच साइबर पुलिस कर रही है।

दूसरा मामला करनपुर गांव निवासी 41 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, उसे 29 जून को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने दावा किया कि उसकी बीमा पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज लंबित हैं। आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ित को बताया कि दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद उसकी पॉलिसी में जमा रकम वापस दिलाई जा सकती है। इसी बहाने उसे रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा करने के लिए कहा गया।

पीड़ित को कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया गया कि उसके द्वारा भेजी गई रकम ब्याज सहित वापस कर दी जाएगी। इसके बाद उसने 9 जुलाई से 5 सितंबर के बीच कुल 12 बार राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण के जरिए रकम ट्रांसफर की। इन लेन-देन के माध्यम से कुल ₹13 लाख अलग-अलग बैंक खातों में भेजे गए। शिकायत के अनुसार, जब ठगी करने वालों ने उससे अतिरिक्त ₹4 लाख जमा करने को कहा, तब उसे संदेह हुआ और उसने समझा कि वह साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है।

दोनों मामलों में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी और धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है, जिनका इस्तेमाल कथित ठगी में किया गया।

पहले मामले में जांच का मुख्य केंद्र संदिग्ध एपीके फाइल है। ऐसी फाइलें सामान्य एप्लीकेशन स्टोर के बजाय सीधे भेजी जा सकती हैं और मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद उपयोगकर्ता के डिवाइस पर विभिन्न प्रकार की अनधिकृत गतिविधियों का जोखिम पैदा कर सकती हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फाइल किस नंबर या डिजिटल खाते से भेजी गई और उसके पीछे कौन लोग थे।

दूसरे मामले में पुलिस ने बैंक खातों के जरिए रकम के प्रवाह की जांच शुरू की है। अलग-अलग खातों में भेजी गई ₹13 लाख की रकम की आगे की गतिविधियों को खंगालकर कथित गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को निशाना बनाया था या नहीं।

साइबर ठगी के इन दोनों मामलों में बैंक लेन-देन, फोन कॉल और डिजिटल गतिविधियों को जांच का आधार बनाया जा रहा है। पुलिस संदिग्ध खातों और नंबरों की जानकारी जुटाकर कथित आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ठगी में इस्तेमाल किए गए नेटवर्क और धन के पूरे प्रवाह की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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