अनूपशहर में दो बैंक खातों के जरिए कथित साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का खुलासा हुआ है। NCRP और JMIS के तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस म्यूल अकाउंट, यूपीआई ट्रांजैक्शन, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क की जांच कर रही है।

अनूपशहर में दो बैंक खातों से साइबर ठगी के लेनदेन का खुलासा

Team The420
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बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के अनूपशहर क्षेत्र में पुलिस ने दो बैंक खातों के माध्यम से कथित साइबर ठगी की रकम के लेनदेन का मामला सामने आने के बाद विस्तृत जांच शुरू की है। पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और समन्वय (JMIS) प्लेटफॉर्म के तकनीकी विश्लेषण में दो संदिग्ध बैंक खातों की पहचान हुई, जिनका कथित रूप से साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के संग्रह, हस्तांतरण और निकासी के लिए उपयोग किया जा रहा था।

पुलिस जांच के अनुसार, पहला मामला अनूपशहर स्थित यस बैंक शाखा के एक खाते से जुड़ा है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी अजय राय के नाम पर संचालित बताया गया है। इस खाते के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर निवासी एक शिकायतकर्ता ने ₹10,000 की साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का कथित रूप से साइबर अपराध में उपयोग किया गया था। पुलिस खाते के खुलवाने से संबंधित दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

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दूसरा मामला भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की जिरौली शाखा के एक खाते से संबंधित है, जो बुलंदशहर के डिबाई निवासी सौरभ कुमार के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। पुलिस के अनुसार, इस खाते के खिलाफ उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। शिकायतों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल भुगतान के माध्यम से धनराशि स्थानांतरित किए जाने के आरोप शामिल हैं।

तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि दोनों खातों में कम समय के भीतर यूपीआई (UPI) के माध्यम से बड़ी मात्रा में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुए। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट (Mule Account) के रूप में किया जा रहा था, जहां साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि जमा कर उसे आगे विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जाता था ताकि वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।

पुलिस बैंक खातों के संपूर्ण लेनदेन, लाभार्थी खातों, मोबाइल नंबरों, केवाईसी दस्तावेजों, आईपी लॉग, यूपीआई रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इन खातों के संचालन में किसी संगठित साइबर अपराध नेटवर्क, बैंकिंग म्यूल गिरोह या अन्य सहयोगियों की भूमिका रही या नहीं।

इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब म्यूल बैंक खातों, फर्जी केवाईसी और डिजिटल भुगतान नेटवर्क का उपयोग कर ठगी की रकम को तेजी से विभिन्न खातों में स्थानांतरित करते हैं, जिससे जांच को जटिल बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल फोरेंसिक और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग, तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क या अन्य संदिग्धों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

About the author — Suvedita Nath is a science student with a growing interest in cybercrime and digital safety. She writes on online activity, cyber threats, and technology-driven risks. Her work focuses on clarity, accuracy, and public awareness.

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