अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कर्मचारियों, प्रोफेसरों, डॉक्टरों और शहर के अन्य लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी फर्जी फाइनेंस कंपनियों में निवेश के नाम पर लोगों को रकम लगाने के लिए तैयार करता था। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं।
यह मामला थाना सिविल लाइन और क्वार्सी क्षेत्र में दर्ज पांच मुकदमों के बाद सामने आया। इन मामलों में AMU के प्रोफेसर, कर्मचारी और डॉक्टर समेत कई लोगों ने शिकायत की थी। आरोप था कि अनूपशहर रोड स्थित एमराल्ड गुलिस्ता अपार्टमेंट निवासी जुनैद पुत्र मूसा काशिर और उसके कथित गिरोह ने फाइनेंस कंपनियों में निवेश के नाम पर लोगों से रकम ली और बाद में उसका भुगतान नहीं किया।
पुलिस जांच में शिकायतों में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने सात अगस्त को AMU के पूर्व छात्र जुनैद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूछताछ और शिकायतों की जांच के दौरान उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने लगी।
पुलिस के अनुसार, जुनैद पर स्वर्ण जयंती नगर निवासी सौरभ पाठक से ₹66 लाख, फिरदौस नगर निवासी नजीरूल हसन से ₹6 लाख और AMU के प्रोफेसर मासूम रजा से निवेश के नाम पर ₹1 करोड़ लेने का आरोप है। इन मामलों के अलावा भी कई अन्य लोगों से रकम लिए जाने की शिकायतें पुलिस के सामने आई हैं।
मामले ने उस समय ज्यादा गंभीर रूप ले लिया था, जब जुनैद और उसके कथित नेटवर्क पर करीब 200 लोगों से ₹100 करोड़ से अधिक की ठगी किए जाने का दावा सामने आया। इस संबंध में अप्रैल में एक समाजसेवी और अधिवक्ता ने कथित पीड़ितों के साथ प्रेस वार्ता भी की थी। बड़े पैमाने पर ठगी के आरोप सामने आने के बाद पुलिस और AMU प्रशासन के स्तर पर भी मामले को लेकर हलचल बढ़ गई थी।
हालांकि, पूछताछ के दौरान जुनैद ने कथित तौर पर अलग तस्वीर पेश की। उसके अनुसार, उसकी कंपनियों से करीब 50 से 60 लोग जुड़े हुए थे और इन लोगों ने लगभग ₹40 से ₹50 करोड़ का निवेश किया था। आरोपी के मुताबिक, वर्तमान में उसके संपर्क में करीब 12 निवेशक थे, जबकि पुलिस के सामने दर्ज मुकदमों में पांच लोगों ने ही शिकायत की है।
पुलिस अब इन अलग-अलग दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि संबंधित कंपनियां वास्तव में किस प्रकार का कारोबार कर रही थीं और निवेश के नाम पर लोगों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। पुलिस बैंक खातों, कंपनी से जुड़े दस्तावेजों और निवेशकों से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह में शामिल लोगों की भूमिका भी अलग-अलग स्तर पर रही हो सकती है। कुछ लोग संभावित निवेशकों की पहचान करने, उनसे संपर्क स्थापित करने और निवेश के लिए भरोसा दिलाने का काम करते थे, जबकि रकम के लेनदेन और कंपनियों के संचालन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इसी जांच के क्रम में पुलिस ने जुनैद के कथित साथी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, दीपक कुमार मुकंद विहार निवासी लक्ष्मीनारायण का पुत्र है। उसे गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस अब मामले में फरार चल रहे दो अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। उनके संभावित ठिकानों पर दबिश देने के साथ ही पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वे कथित निवेश नेटवर्क में किस भूमिका में थे।
जांच एजेंसियां उन लोगों की सूची भी तैयार कर सकती हैं, जिन्होंने संबंधित कंपनियों में रकम लगाई थी या जिनसे निवेश के नाम पर संपर्क किया गया। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि कथित ठगी का वास्तविक दायरा कितना था और कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस का कहना है कि दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ कथित वित्तीय नेटवर्क और रकम के लेनदेन की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
