रिश्तेदार बताकर बाहरी लोगों को दिलाए मुफ्त टिकट, कुछ कर्मचारियों ने टिकट ऊंचे दामों पर बेचकर कमाया पैसा; अब लौटानी होगी रकम

फ्री टिकट का खेल: एयर इंडिया के 4,000 से अधिक कर्मचारी ईएलटी दुरुपयोग में फंसे

Team The420
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नई दिल्ली/मुंबई। टाटा समूह के स्वामित्व वाली विमानन कंपनी Air India में अवकाश यात्रा सुविधा के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। एयरलाइन की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि 4,000 से अधिक कर्मचारियों ने कंपनी की एम्प्लॉयी लीव ट्रैवल (ELT) नीति का गलत फायदा उठाया। कंपनी ने अब इस मामले में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है और उनसे धोखाधड़ी के जरिये प्राप्त राशि वापस करने को कहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह मामला पिछले वित्त वर्ष से जुड़ा हुआ है और इसमें एयरलाइन की आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। हालांकि इस दुरुपयोग के कारण हुए कुल वित्तीय नुकसान की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे एयरलाइन के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जा रहा है।

एयर इंडिया ने मामले की जांच पूरी होने के बाद संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर दिया है। उन्हें चेतावनी दी गई है कि यदि वे नियमों के उल्लंघन से हासिल की गई राशि वापस नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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क्या है ईएलटी नीति

एयर इंडिया में कर्मचारियों के लिए एक विशेष अवकाश यात्रा नीति लागू है, जिसे ईएलटी (Employee Leave Travel) कहा जाता है। इस नीति के तहत कर्मचारियों को साल में निश्चित संख्या में मुफ्त या रियायती हवाई टिकट उपलब्ध कराए जाते हैं।

इन टिकटों का उपयोग कर्मचारी स्वयं या उनके द्वारा नामित कुछ नजदीकी रिश्तेदार—जैसे जीवनसाथी, माता-पिता या आश्रित परिवार के सदस्य—कर सकते हैं। कंपनी ने इस सुविधा को कर्मचारियों के कल्याण और प्रोत्साहन के उद्देश्य से शुरू किया था।

लेकिन आंतरिक जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने इस नीति का गलत इस्तेमाल किया।

रिश्तेदार बनाकर दिलाए टिकट

जांच के दौरान सामने आया कि कई कर्मचारियों ने ऐसे लोगों को अपने रिश्तेदार के रूप में नामित कर दिया, जिनसे उनका कोई पारिवारिक संबंध नहीं था।

इन फर्जी नामांकन के जरिए बाहरी लोगों को मुफ्त या रियायती टिकट दिलाए गए। इससे कंपनी की नीति का खुला उल्लंघन हुआ।

कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि कर्मचारियों ने कंपनी से मिलने वाले मुफ्त टिकट खुद लेने के बाद उन्हें बाहरी यात्रियों को ऊंची कीमत पर बेच दिया। इस तरह उन्होंने व्यक्तिगत लाभ कमाने के लिए कर्मचारी सुविधा का इस्तेमाल किया।

आंतरिक जांच में खुलासा

सूत्रों के अनुसार, एयरलाइन के वित्त और प्रशासनिक विभाग द्वारा की गई विस्तृत आंतरिक जांच में इन अनियमितताओं का पता चला। जांच में टिकट उपयोग के रिकॉर्ड, नामित रिश्तेदारों के विवरण और यात्रा पैटर्न का मिलान किया गया।

इसी प्रक्रिया में कई संदिग्ध लेनदेन और नामांकन सामने आए, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

कंपनी के सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई एयरलाइन के आंतरिक नियंत्रण और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए की जा रही है।

टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद सुधार प्रक्रिया

ज्ञात हो कि Tata Group ने जनवरी 2022 में घाटे में चल रही एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। इसके बाद एयरलाइन में बड़े पैमाने पर संरचनात्मक सुधार और संचालन में पारदर्शिता लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

एयर इंडिया वर्तमान में एक व्यापक परिवर्तन योजना लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य कंपनी के संचालन, वित्तीय स्थिति और सेवा गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

24 हजार से अधिक कर्मचारी

एयर इंडिया में वर्तमान समय में 24,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इतने बड़े कार्यबल के बीच कर्मचारी सुविधाओं के दुरुपयोग का यह मामला कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती बन गया है।

हालांकि एयरलाइन प्रबंधन का कहना है कि नीति उल्लंघन के मामलों में सख्ती बरती जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमों को और कड़ा किया जा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में प्राथमिक लक्ष्य वित्तीय नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना है। इसी कारण संबंधित कर्मचारियों को पहले चरण में गलत तरीके से प्राप्त रकम वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।

एयरलाइन प्रबंधन का मानना है कि इस कार्रवाई से कर्मचारियों के बीच अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, साथ ही कंपनी की आंतरिक नीतियों के पालन को भी मजबूत किया जा सकेगा।

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